दतिया में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई आम लोगों के लिए सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उम्मीद बनकर सामने आया। कलेक्ट्रेट के सभा कक्ष में जहां जिला पंचायत सीईओ अक्षय कुमार ने लोगों की समस्याएं सुनीं, वहीं एसपी कार्यालय में एसपी सूरज वर्मा के सामने फरियादियों का दर्द खुलकर सामने आया। दोनों ही स्थानों पर अधिकारी गंभीर नजर आए और अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए, जिससे जनसुनवाई के बाद लोग संतुष्ट दिखाई दिए। कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में सबसे ज्यादा मामले जमीन से जुड़े रहे। कहीं शासकीय भूमि पर पट्टे की मांग थी तो कहीं अतिक्रमण हटाने को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद। रायपुर सानी निवासी लीलावती, जो पांच बेटियों की मां और भूमिहीन मजदूर हैं, ने शासकीय भूमि पर कृषि पट्टा देने की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उसी जमीन से परिवार का भरण-पोषण होता है। वहीं, दतिया शहर की रहने वाली सुमन ने करीब 50 साल से बसे कच्चे मकान की भूमि पर पट्टा दिलाने की मांग रखते हुए कहा कि अगर पट्टा नहीं मिला तो परिवार के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी तरह इंदरगढ़ तहसील के रानीपुरा गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने आम रास्ते पर अतिक्रमण और हल्का पटवारी व पंचायत सचिव पर आदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने दो टूक कहा कि रास्ता बंद होने से खेती-किसानी तक प्रभावित हो रही है। धोखाधड़ी का मामला भी चर्चा में रहा
दूसरी ओर एसपी कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला चर्चा में रहा। झांसी जिले के बेदोरा निवासी अनिल राजपूत ने आरोप लगाया कि दतिया के कुछ लोगों ने “गड़ा हुआ धन निकालकर पैसा दोगुना करने” का झांसा देकर उससे करीब 8 से 10 लाख रुपए ठग लिए। पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने पूजा-पाठ, नशीला पदार्थ पिलाने और फर्जी पुलिस बनकर डराने तक की साजिश रची। जब पैसे वापस मांगे तो मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई। एसपी सूरज वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और उचित कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। कुल मिलाकर जनसुनवाई में जमीन, पट्टा, अतिक्रमण और धोखाधड़ी जैसे मुद्दे छाए रहे। अधिकारियों के सख्त रुख और त्वरित निर्देशों ने फरियादियों को यह भरोसा जरूर दिलाया कि उनकी आवाज अब फाइलों में नहीं दबेगी।


