भास्कर न्यूज | महासमुंद सरायपाली ब्लॉक के शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव में डमी शिक्षक से पढ़ाई कराए जाने के गंभीर मामले ने अब प्रशासनिक युद्ध का रूप ले लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने जांच में जानबूझकर की जा रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को अंतिम चेतावनी जारी की है। इस कड़े रुख के बाद विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास ने फरवरी 2025 में एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। शिकायत के अनुसार विद्यालय के प्रधानपाठक धनीराम चौधरी लकवाग्रस्त होने के कारण एक साल से अधिक समय से अनुपस्थित थे, लेकिन उनकी जगह किसी अनधिकृत बाहरी व्यक्ति से शिक्षण कार्य कराया जा रहा था। जो डमी शिक्षक था। इस गंभीर अनियमितता पर नवंबर 2025 में जांच दल तो बना, लेकिन तीन महीने बाद भी फाइल एक कदम आगे नहीं बढ़ी। इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बद्री विशाल जोल्हे विकासखंड शिक्षा अधिकारी बसना ने जिला कार्यालय को पत्र लिखकर अपनी बेबसी जाहिर की। बीईओ ने स्वीकार किया कि जांच के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं का भारी दबाव है। स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने ब्लॉक स्तरीय टीम को निरस्त कर जिला या उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने की मांग की है।


