दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा, मैं अब जा रहा हूं:कैंसर पीड़ित ने किया सुसाइड; नोट में लिखा- तेरहवीं में मृत्यु भोज न दिया जाए

मीना मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरी तेरहवीं में मृत्यु भोज न दिया जाए। सब साधारण तरीके से निपटा लिया जाए। हो सके तो मेरी ये आखिरी इच्छा पूरी करना। मीना तू घबराना नहीं, क्योंकि तू कमजोर दिल की है। हिम्मत रखना। यह बातें शहर की साईं सिटी कॉलोनी में रहने वाले हरिओम राठौर ने अपने सुसाइड नोट में लिखीं। उन्होंने मंगलवार सुबह अपने घर में रस्सी से फंदा बनाकर सुसाइड कर लिया था। मिली जानकारी के अनुसार हरिओम राठौर(46) पिता तुलसीराम राठौर अपने परिवार के साथ कैंट थाना इलाके की साईं सिटी कॉलोनी में रहते थे। परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। वो फ्रूट्स का ठेला लगाते थे। हरिओम लंबे समय से पेट संबंधी बीमारी से ग्रसित थे। उनका इलाज भी चल रहा था। भोपाल, इंदौर सहित कई जगह डॉक्टरों को दिखाया था। बेटी ने देखा कि पिता के कमरे का दरवाजा बंद है
उनके छोटे भाई कृष्णा ने बताया कि रोज की तरह सोमवार शाम उन्होंने परिवार के साथ खाना खाया। परिवार के सदस्य रात लगभग 12 बजे तक बातें करते रहे। इसके बाद सभी सोने चले गए। सुबह लगभग 4:30 बजे उनकी बड़ी बेटी किचन में पानी लेने के लिए गई। इसी दौरान उसे पिता के कमरे का दरवाजा बंद दिखा। उसने गेट खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। गेट तोड़ा तो फंदे पर लटका मिला शव
इसके बाद उसने परिवार के बाकी लोगों को जगाया। उन्होंने भी कमर का गेट काफी देर तक खटखटाया। उन्होंने हरिओम के मोबाइल पर कॉल भी किया, लेकिन कॉल नहीं उठा। इसके बाद परिवार वालों ने गेट तोड़ा और अंदर गए, तो वो फंदे पर लटके हुए थे। रस्सी से उन्होंने कमरे में लगे पंखे पर फंदा बनाया और उस पर झूल गए। सुसाइड नोट में ये लिखा…
हरिओम राठौर ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है, उसमें उन्होंने लिखा- “मेरी प्यारी मम्मी, मेरे भाई कृष्णा, सुषमा और परिवार के सब सदस्य और बच्चों। सबको मेरा प्यार। मुझसे अब और दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा। अब मैं जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना और तुम सब हिम्मत से काम लेना। सब मिल जुलकर रहना। सुषमा अब और दर्द सहन नहीं कर सकता। मेरे(अग्नाशय) में कैंसर है, जो शायद कभी ठीक नहीं हो सकता। सुषमा घबराना नहीं, हिम्मत से काम लेना। कुछ काम करने लग जाना। बेटा प्राची, सब बच्चों का ख्याल रखना और मिलजुलकर रहना, हिम्मत मत हारना। एक दिन सब ठीक हो जाएगा। जाने अनजाने में मुझसे जो गलती हुई हो, उसे माफ कर देना। सब खुश रहना, तभी मेरी आत्म को शांति मिलेगी। मैंने ये फैसला बहुत सोच समझकर लिया है। मैं हरिओम मेरी मर्जी से ये कदम उठा रहा हूं…
मीना, भारती, कृष्णा भगवान से दुआ करूंगा कि हर जन्म में तुम्हारे जैसे भाई बहन मिलें। दीपक, नरेश भैया, पूजा भाभी तुम लोगों ने भी बहुत साथ दिया है। जब तक मेरे बच्चे बड़े नहीं हो जाते, उनका साथ देते रहना। मीना मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरी तेरहवीं में मृत्यु भोज न दिया जाए। सब साधारण तरीके से निपटा लिया जाए। हो सके तो मेरी ये आखिरी इच्छा पूरी करना। मीना तू घबराना नहीं, क्योंकि तू कमजोर दिल की है, हिम्मत रखना। मैं हरिओम मेरी मर्जी से ये कदम उठा रहा हूं। किसी को भी पुलिस प्रशासन की ओर से परेशान न किया जाए। धन्यवाद।”

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