दलालों ने गिराया मेले का स्वरूप…:बढ़ा हुआ किराया वसूलने पुरानी दुकानें नहीं हो रहीं सरेंडर

व्यापार मेले में दुकान माफिया और प्राधिकरण के कर्मचारियों की मिलीभगत का आलम यह है कि कारोबार बंद कर चुके कारोबारियों की दुकानें लिखित पत्र देने के बाद भी कागजों में सरेंडर नहीं की जा रही हैं, इन्हीं दुकानों को दूसरों को आवंटित कर दुकान प्राधिकरण के कर्मचारी लाखों रुपए वसूल रहे हैं। हालांकि इसका लाभ प्राधिकरण को नहीं मिल रहा है, ये उनकी व्यक्तिगत कमाई है। इसका परिणाम यह है कि शहर के तमाम व्यापारियों को दुकानें नहीं मिल पा रही हैं। दुकान माफिया और प्राधिकरण के कर्मचारियों के गठजोड़ का परिणाम यह है कि मेले में बाहर से आने वाले बड़े व्यापारी और स्थानीय बड़े शोरूमों की संख्या कम होती जा रही है। पिछले एक दशक में लगातार गिरते मेले के स्तर को देखते हुए सैलानियों की संख्या में भी कमी आई है। व्यापार मेले की शुरुआत की तिथि 25 दिसंबर तय है। लेकिन दुकानों की कालाबाजारी के कारण अभी तक मेले की लगभग 300 से ज्यादा दुकानें पूरी तरह से खाली पड़ी हैं। ये दुकानें भी माफिया के कब्जे में हैं, जो अभी महंगा किराया वसूलने की जुगाड़ में ऐसे कारोबारियों का इंतजार कर रहा है। हालांकि मेला प्राधिकरण के पदाधिकारियों का दावा है कि सभी दुकानों का शत-प्रतिशत आवंटन कर दिया गया है। यही कारण है कि अभी तक 40% भी मेला तैयार नहीं हो सका है। एक भी सेक्टर में दुकानें पूरी तरह से नहीं बन सकी हैं। कश्मीरी बाजार, मीना बाजार समेत अन्य सेक्टरों में दुकानों का बनना भी शुरू नहीं हुआ है। केवल झूला सेक्टर 80% तैयार हुआ है। वहीं मेले की दुकानों का मैंटेनेंस करने का भी झूठा दावा भी प्राधिकरण कर रहा है, मगर सच्चाई यह है कि टूटी और खुदी हुई दुकानों पर ही पुताई कर दी गई है। पिछले एक दशक से लगातार गिर रही मेले की साख ने सैलानियों की संख्या भी कम की ऐसे समझिए… प्राधिकरण कर्मचारियों ​की मिलीभगत का खेल
इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भगवती इलेक्ट्रॉनिक्स के नाम से लगने वाले शोरूम के लिए दुकान क्रमांक 301 से 305 तक आवंटित की गई थीं। कारोबार में नुकसान के कारण संचालक ने पिछले पांच साल से मेले में शोरूम नहीं लगाया। फिर भी प्राधिकरण ने इन दुकानों को दूसरे के नाम आवंटित नहीं किया। हर साल इसी नाम से दुकानें दूसरों को आवंटित की जाती रहीं। 2021-22 में इन दुकानों को एबी जोन को मोटा​ किराया वसूलकर दिया गया। अगले मेले में एबी जोन के संचालक ने उक्त दुकानों का आवंटन अपने नाम पर कराने का पत्र दिया। प्राधिकरण में बैठे बाबू ने ऐसा करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उसके बाद से फर्म संचालक अब तक पांच पत्र लिख चुके हैं। भगवती इलेक्ट्रॉनिक के संचालक भी लिखकर दे चुके हैं कि उनकी दुकानें सरेंडर कर एबी जोन को दे दी जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। ये शिकायत मेला प्राधिकरण से लेकर संभागायुक्त तक हुई, लेकिन प्राधिकरण के बाबू के आगे किसी की नहीं चली। इससे परेशान एबी जोन के संचालक ने मेले में शोरूम लगाना ही बंद कर दिया। ब्लैक में दुकान खरीदना व्यापारी की मजबूरी है
^व्यापारी मजबूरी में ब्लैक की दुकान खरीदता है, क्योंकि मेले में एक गैंग सक्रिय है, जिसकी सहमति से ही प्राधिकरण चलता है। वे जिसे चाहते हैं उन्हें ही दुकान मिल पाती है। इस संबंध में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑ‍ल इंडिया ट्रेडर्स साक्ष्यों व भास्कर की खबरों को संकलित कर सीएम व उद्योग मंत्री को भेजेंगे। अगर कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो कोर्ट जाएंगे।
– भूपेंद्र जैन, प्रदेश अध्यक्ष, कैट बाहर के व्यापारियों का आना बंद हो गया
^मेले में दुकानों के ब्लैक होने के कारण बाहर के व्यापारियों को दुकानें नहीं मिल पाती। इसी के कारण धीरे-धीरे अन्य राज्यों के व्यापारियों ने मेले में आना बंद कर दिया है। दुकानों को ब्लैक करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। चैंबर इसके लिए क्या कर सकता है, बाकी सदस्यों से चर्चा की जाएगी।
– दीपक अग्रवाल, मानसेवी सचिव, दीपक अग्रवाल ऑनलाइन पोर्टल बनवाएंगे
^दुकानों की ब्लैक​मेलिंग रोकने के लिए पोर्टल बनवाएंगे। कुछ दुकानों के आवंटन निरस्त किए जाएंगे। प्राधिकरण के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई करेंगे। व्यापारियों के लिए सहायता प्रकोष्ठ बनाएंगे। आगामी दो दिन में सभी आवंटित दुकानों की सूची चस्पा कर देंगे, एमपीआईडीसी के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर संजय शर्मा को दुकान आवंटन का इंचार्ज बना दिया है।
– मनोज खत्री, संभागायुक्त मेले के प्रवेश द्वार पर ही बना दिया हॉकर्स जोन प्राधिकरण कर्मचारियों की मनमानी के कारण मेले का स्तर किस तरह से गिर रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेला प्राधिकरण के सामने की पट्टी में जहां इलेक्ट्रॉनिक के बड़े शोरूम लगा करते थे, वहां अब हॉकर्स जोन बना दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि मेले का स्तर शोरूम से हटकर फुटपाथिया बाजार की ओर चल दिया है। इतना ही नहीं मेले के रास्तों पर हॉकर्स का बैठना मना है ​लेकिन अवैध वसूली के लिए मेले के सभी रास्तों पर फुटपाथिया कारोबारी और ठेले वालों को खड़ा कराया जाता है। इससे यहां आने वाले सैलानियों को पैदल मेला घूमने में भी परेशानी होती है।

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