दिग्विजय बोले:धर्म के ठेकेदार सबसे ज्यादा धर्मविरोधी काम कर रहे:मुझे मुसलमान बताने वाले मंदिरों और सरकारी जमीनों पर कब्जा किए हैं

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंदिरों की माफी भूमि की नीलामी को लेकर भाजपा सरकार पर बड़ा और तीखा हमला बोला है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे मुसलमान बताने वाले ही आज मंदिरों और सरकारी जमीनों पर कब्जा किए बैठे हैं। जो लोग धर्म का ठेका लिए घूमते हैं, वही सबसे ज्यादा धर्म विरोधी काम कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि मंदिरों की जमीन नीलाम कराने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह संविधान, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सनातन परंपराओं- तीनों का उल्लंघन है। ‘देवता के नाम दर्ज जमीन सरकारी नहीं’
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मंदिरों की माफी भूमि किसी सरकार की नहीं, बल्कि देवी-देवताओं के नाम पर दर्ज संपत्ति है। यह जमीन सदियों से पुजारियों की आजीविका, मंदिरों के रखरखाव और धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग होती रही है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा नीलामी की प्रक्रिया शुरू करना न्यायालय की अवहेलना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा है कि देवता के नाम दर्ज भूमि न तो नीलाम की जा सकती है और न ही कलेक्टर के नाम दर्ज की जा सकती है, यहां तक कि उसे लीज पर देने पर भी रोक है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश सरकार उसी नीति को आगे बढ़ा रही है। पुजारियों की आजीविका पर सीधा प्रहार
दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में 50 हजार से अधिक पुजारी हैं, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं। मंदिरों की जमीन नीलाम करने से उनके जीवन-यापन और मंदिरों की सेवा-पूजा पर सीधा असर पड़ेगा।उन्होंने कहा, “यह सरकार खुद को सनातन संस्कृति की संरक्षक बताती है, लेकिन हकीकत में पुजारियों और मंदिरों की आर्थिक रीढ़ तोड़ रही है।” मुख्यमंत्री पर भी उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन के विधायक हैं, जहां महाकालेश्वर मंदिर स्थित है। ऐसे में मंदिरों की जमीन नीलाम करने का फैसला और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो वे पुजारी समाज के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।दिग्विजय सिंह ने पुजारियों से अपील की कि वे श्रद्धालुओं को इस फैसले की सच्चाई बताएं और यह समझाएं कि किस तरह सरकार मंदिरों की संपत्ति को निशाना बना रही है। अपने कार्यकाल का दिया उदाहरण
दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे तब उन पर मंदिरों पर कब्जा करने के आरोप लगाए गए थे। हरिद्वार से आए साधु-संतों के प्रतिनिधिमंडल से मुख्य सचिव की मौजूदगी में चर्चा हुई थी, जिसमें संतों ने स्वीकार किया कि उन्हें गुमराह किया गया था और बाद में उन्होंने उनके पक्ष में प्रस्ताव भी पारित किया।

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