दिव्यांग महिला ने आर्थिक सहायता से शुरू किया स्वरोजगार:मेले में दुकान लगाई, 6 हजार की कमाई हुई; कलेक्टर को धन्यवाद देने पहुंचीं रूपवती

मंजिल उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है गुना की श्रीराम कॉलोनी निवासी रूपवती अहिरवार ने। शारीरिक अक्षमता को पीछे छोड़ते हुए रूपवती ने न केवल आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी, बल्कि अन्य दिव्यांगों के लिए भी एक मिसाल पेश की है। मंगलवार को रूपवती अहिरवार ने जनसुनवाई में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को अपनी व्यथा सुनाई थी। रूपवती और उनके पति दोनों 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। आर्थिक तंगी और बच्चे के भविष्य की चिंता के बीच उन्होंने कलेक्टर से स्वरोजगार के लिए मदद मांगी थी। मामले की गंभीरता और परिवार के जज्बे को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल रेडक्रॉस के माध्यम से 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की। कलेक्टर से मिली इस सहायता राशि से रूपवती ने शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल टेकरी सरकार परिसर में खिलौने की दुकान लगाई। उनकी मेहनत का फल उन्हें पहले ही दिन मिला, जहाँ उन्होंने 6 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया। इस सफलता ने न केवल उनके परिवार को आर्थिक संबल दिया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया। इस मंगलवार को रूपवती दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचीं, लेकिन इस बार वे मदद मांगने नहीं बल्कि कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का आभार जताने आई थीं। उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि वे अब अपने इस व्यापार को और बढ़ाना चाहती हैं। कलेक्टर ने उनके प्रयासों की सराहना की और भविष्य में भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया। रूपवती ने दिव्यांग साथियों को संदेश दिया है कि हम शारीरिक रूप से भले ही अक्षम हों, लेकिन हमारे हौसले बुलंद हैं। अगर हम संघर्ष करने का ठान लें, तो जीवन में कभी परेशान होने की नौबत नहीं आएगी।

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