दुनिया का सबसे अमीर इंसान वह है जिसके पास बैठे गरीब को अहसास न हो वह गरीब है: खान सर

जालंधर की फ्लाइट ने चडीगढ़ उतार दिया। फिर वहां से बाय रोड आए। हमें लगा कहीं भूख-प्यास से चले न जाएं, लेकिन यहां आकर लगा कि पटना में ही खड़े हैं। यू ऑल ऑर द फ्यूचर अॉफ इंडिया। जब हम देखते हैं कि किसी बिल्डिंग में पिलर ज्यादा हैं, तो दिल बड़ा खुश होता है कि बिल्डिंग बहुत मजबूत है। उसी तरह आप सब को देखकर खुशी है। आप अलग-अलग फैमिली बैकग्राउंड से आए हैं अलग-अलग सपने लेकर। हम खाली हाथ जरूर आते हैं, लेकिन खाली हाथ जाना नहीं है। वो काम करें जिससे देश आप पर गर्व करे। मेहनत जरूरी है। अरे बाबू लोग, अपने आप को समय देना सीखो, गांधी जी के पहले तीन बंदर थे, चौथा मोबाइल लेकर घूम रहा है। आज-कल के 20 सेकेंड के वीडियो में भी लिखना पड़ता है कि वेट फॉर एंड। आज अच्छा डिस्कशन वाला ग्रुप होना चाहिए। ऐसा ग्रुप बनाएं, जहां सीखने को मिले। आप खुशनसीब बच्चे हैं। जहां इतना अच्छा कैंपस मिला है। हमारा सरकारी स्कूल टूट कर गिरता था। लोग कहते हैं कि महिलाएं पीछे हैं, लेकिन कभी महिलाओं से पूछिए कि वह पीछे क्यों हैं कि एक पुरुष आगे बढ़ सकें, इसलिए पूरा जीवन न्योछावर कर देती हैं। अगर बच्चा पालने की जिम्मेदारी पुरुषों की रहती तो जनसंख्या की चिंता नहीं रहती। स्मार्ट सिटी से ज्यादा जरूरी है कि स्मार्ट गांव, क्योंकि गांव के लोग ही शहर आते हैं। नेशन बिल्डिंग के लिए पढ़ाई जरूरी है। दुनिया का सबसे आसान काम पढ़ना है। तुम (बिहार के स्टूडेंट्स को) बहुत समझदार हो जो बिहार छोड़ दिए, वहां की यूनिवर्सिटी में रहते तो बर्बाद हो जाते। जरूरी नहीं जिंदगी बर्बाद करने के लिए दिल लगाएं, बिहार आकर ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं ।’ जालंधर| छात्र संसद इंडिया कॉन्क्लेव का 8वां संस्करण में 20,000 से अधिक युवा और देश के प्रभावशाली नेता एक साथ आए और विजन इंडिया 2047: भारत @ 100 थीम के साथ, कॉन्क्लेव में विचारों, जुनून और ऊर्जा के बारें में चर्चा हुई। खान सर की बातों को उन्हीं के शब्दों में पढ़िए… हमें जीवन की रेस ऐसी रखनी है कि भले दुश्मन भी आगे निकल जाएं, लेकिन एक भी दोस्त पीछे नहीं छूटना चाहिए। वो कहते हैं कि न तुम रो पड़ोगे, इस कदर हम तुमसे हारेंगे। तो संसार में हम यहां पर अच्छे से हैं तो अपने संस्कार मेंटेन करके रखें । 100 वर्षों में एजुकेशन कैसा होना चाहिए। उसको भी देखिए। आज किसानों को देखिए, उनके पास अच्छी वैरायटी का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। यदि हो पा रहा है तो कीड़े-मकोड़े खा कर खत्म कर दे रहे हैं। यदि उसको समय से नहीं बेचा तो सड़ कर खराब हो जाएगा। अगर उत्पादन ज्यादा कर दिया तो अनाज सस्ता हो जाएगा, उसको लॉस होगा। एकमात्र किसान ऐसा है, जो मेहनत करता है तो पछताता है। हमारे देश में सबसे सेक्युलर पैसे हैं, जो मंदिर, मस्जिद में भी जाते हैं। इसमें कोई शुद्ध-अशुद्ध, जाति भेदभाव नहीं होता।

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