दुनिया में केवल बनारस में मिलती है पलंग तोड़ मिठाई:गोबर के उपले पर रोजाना सिर्फ 8 किलो बनती है, खाने के लिए वेटिंग

बनारस पूरी दुनिया में अपने जायके के लिए फेमस है। ऐसा ही अनोखा स्वाद पलंग तोड़ मिठाई का है। यह मिठाई सिर्फ ठंड के मौसम में मिलती है। इस मौसम में अगर आप बनारस घूमने आ रहे हैं, तो इस मिठाई का स्वाद जरूर चखें। 60 साल पुराना स्वाद जबान से सिर चढ़कर बोलता है। 12 घंटे में यह मिठाई बनकर तैयार होती है, लेकिन चंद घंटों में बिक जाती है। पलंग तोड़ मिठाई बनाने का तरीका बेहद कठिन है। आइए दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज जायका में पलंग तोड़ मिठाई के बेहतरीन जायके के बारे में जानते हैं… बनारस के चौक क्षेत्र के पक्के महाल में परशुराम मंदिर है। इसके सामने भैरव सरदार की दूध, दही और मलाई की पुरानी दुकान है। इसी दुकान पर आपको बनारस की प्रसिद्ध पलंग तोड़ मिठाई मिलेगी। कारीगर सुबह से इस मिठाई को बनाने में जुट जाते हैं। शाम तक मिठाई का स्वाद लेने के लिए लोगों की महफिल सजनी शुरू हो जाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में भैरव सरदार ने बताया कि इस मिठाई को बनाने के लिए रसोई गैस का इस्तेमाल नहीं होता। अगर गैस से इसे बनाया जाएगा, तो इसमें स्वाद नहीं आएगा। पलंग तोड़ मिठाई को बनाने के लिए गाय के गोबर से बने उपलों का इस्तेमाल करते हैं। धीमी धुएं वाली आग में दूध को गर्म किया जाता है। जैसे-जैसे दूध गर्म होता है, इस पर मलाई की परत पड़ने लगती है। इसी मलाई को हम कई बार निकालते हैं। परत-दर-परत मलाई को निकालने के लिए हम पत्तल का इस्तेमाल करते हैं। भैरव सरदार बताते हैं- पत्तल से मलाई निकालने के दौरान बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है। दूसरा- पत्तल से भी मिठाई में स्वाद आता है। इस प्रोसेस में सबसे ज्यादा समय लगता है। केसर और ड्राई फ्रूट्स बनाते हैं इसे खास
भैरव सरदार बताते हैं- मलाई को परत-दर-परत रखने के दौरान मिठाई में केसर-बादाम का इस्तेमाल करते हैं। इसकी क्वालिटी में कोई समझौता नहीं किया जाता। इसके अलावा जमकर ड्राई फ्रूट्स भी डाले जाते हैं। मिठाई में सबसे अहम बात इसकी मिठास की है। इसलिए चीनी की मात्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। मलाई निकालने के बाद जो गाढ़ा दूध बचता है, वह भी इसी मिठाई में इस्तेमाल होता है। मिठाई का नाम पलंग तोड़ क्यों पड़ा?
इस सवाल के जवाब में भैरव सरदार मुस्कुराते हैं। कहते हैं- मेरे दादा लाला सरदार ने पलंग तोड़ मिठाई को बनानी शुरू की थी। इसमें गर्म आइटम मिलाए जाते हैं, जैसे- बादाम-केसर। करीब 60 साल पहले इस मिठाई की बिक्री शुरू हुई। उस समय जब भी कोई शादी करता, तो यहां मिठाई खाने जरूर आता। क्योंकि मिठाई की बिक्री शाम के समय ज्यादा होती थी। इसके चलते लोगों ने इसे अलग तरीके से देखना शुरू कर दिया। फिर इसका नाम पलंग तोड़ मिठाई पड़ गया। पक्के महाल इलाके में कुछ ही दुकानें हैं, जहां पलंग तोड़ मिठाई मिलती है। पलंग तोड़ मिठाई की कीमत
इस मिठाई की कीमत अभी 15 सौ रुपए किलो है। भैरव सरदार बताते हैं- दीपावली से पलंग तोड़ मिठाई बनाना शुरू करते हैं। फिर होली तक यह मिठाई बनती है। बनारस घूमने आए लोग मिठाई को बहुत पसंद करते हैं। लोग पता पूछते हुए हमारी दुकान में आते हैं। कस्टमर रिव्यू…
स्थानीय शुभम पटेल ने बताया- मिठाई बेहद खास है और इसका स्वाद लाजवाब है। पक्के महाल के अलावा देश के कई हिस्सों से लोग यहां आकर इस मिठाई का स्वाद चखते हैं। हमारी पूरी फैमिली इस मिठाई को खाने आती है। ——————————— जायका सीरीज की यह स्टोरी भी पढ़ें काशी चाट के अमित शाह से राजनाथ तक दीवाने, 15 फ्लेवर में मिलता है चटखारा, टमाटर वाले कुल्हड़ की सबसे ज्यादा डिमांड काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा के घाट से लेकर बनारसिया स्वाद… आप काशी आएं और कुछ भी छूटा तो ट्रिप अधूरी समझिए। इस शहर का दिल गोदौलिया है। यहां के स्वादिष्ट व्यंजन-पकवान भी दुनियाभर में अलग ही छाप छोड़ते हैं। हर दिन देश-विदेश से पहुंचने वाले विदेशी मेहमान काशी की मशहूर चाट चखने के लिए पहुंचते हैं। पढ़ें पूरी स्टोरी…

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