झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के कुल 14 मजदूर दुबई में फंसे हुए हैं। इन मजदूरों को बीते तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने भोजन और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि इनसे तय समय से अधिक काम भी कराया जा रहा है, लेकिन मेहनत के बदले मजदूरी नहीं दी जा रही। आर्थिक तंगी और असुरक्षित हालात के बीच फंसे मजदूरों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। वीडियो जारी कर मांगी सरकार से मदद दुबई में फंसे मजदूरों ने अपनी पीड़ा बताते हुए एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने भारत सरकार और झारखंड सरकार से सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगाई है। यह वीडियो प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली को भेजा गया था। जिन्होंने इसे मीडिया के साथ साझा किया। वीडियो में मजदूरों ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। कंपनी प्रबंधन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इस संबंध में सिकन्दर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड के मजदूर विदेश में फंस गए हों। इससे पहले भी बेहतर कमाई के लालच में विदेश गए कई मजदूर कठिन परिस्थितियों में फंस चुके हैं, जिन्हें काफी प्रयासों और कूटनीतिक पहल के बाद स्वदेश वापस लाया गया था। अक्टूबर 2025 में सभी गए थे दुबई जानकारी के अनुसार ये सभी मजदूर अक्टूबर 2025 में ईएमसी कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन का काम करने के लिए दुबई गए थे। गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र के चिचाकी निवासी रोशन कुमार और अजय कुमार, बगोदर के तिरला निवासी राजेश महतो, मंडरो और डुमरडेली निवासी अजय कुमार इसमें शामिल हैं। बोकारो के कंजकीरो निवासी डालेश्वर महतो तथा हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़, सिरैय, पारजोरिया, चकचुको बसरिया और गोरहर थाना क्षेत्र के कुल नौ मजदूर भी दुबई में फंसे हैं। तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण सभी मजदूर और उनके परिजन सरकार से जल्द कार्रवाई कर सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।


