भास्कर न्यूज | अमृतसर दुर्ग्याणा के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में 5 मई से शुरू की गई श्रीमद् भागवत कथा 11 मई को समाप्त होगी। अयोध्या धाम से पधारे आचार्य कुरेशाचार्य महाराज ने कथा में गोवर्धन भगवान का वर्णन किया। शाम 3 से 5 बजे तक चली कथा में महाराज ने भक्तों के साथ मिलकर भगवान श्री कृष्ण का नंदोत्सव मनाया। जिसमें बच्चों और महिलाओं को खिलोने, मिठाई प्रसाद के रूप में बांटी गई। जबकि गहनों के रूप में मोतियों की मालाएं भी भेंट की गई। ब्यास गद्दी पर विराजमान होकर आचार्य कुरेशाचार्य ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। उनके जन्म के शुभ अवसर पर ही जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण इंद्रदेव का अंहकार चकनाचूर करने को नंदगांव के लोगों से गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाई। इंद्रदेव को जब इसका पता चला तो वह क्रोधित हो उठे। उन्होंने लगातार बारिश करवाई ताकि सारा नंद गांव डूब जाए। परंतु भगवान श्री कृष्ण की मुस्कराहट के आगे इंद्रदेव की एक न चली। श्री कृष्ण ने अपने सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर एक सप्ताह तक गांव के लोगों और गाय को बारिश से बचाया। इसके बाद इंद्रदेव ने अपनी भूल स्वीकार की और श्री कृष्ण जी से माफी मांगी। महाराज ने कहा कि श्री कृष्ण जी ने एक सप्ताह तक कुछ नहीं खाया तो फिर नंदगांव के लोगों ने भगवान को छप्पन प्रकार के व्यजनों से भोग लगाए जो आज भी लगाए जाते है। कथा दौरान भक्तों ने भगवान गोवर्धन की आरती उतारी और उन्हें 56 भोग लगाए। जिसमें फल, मिठाई समेत कई व्यजन मौजूद रहे। इस मौके पर मंदिर कमेटी के महासचिव अरुण खन्ना, संकीर्तन चेयरमैन संजीव खन्ना समेत कई भक्तजन मौजूद रहे।


