दुर्ग में लावारिश वाहनों की नीलामी:77 लाख राजस्व मिला, थानों में वाहनों के रखरखाव-सुरक्षा में दिक्कतें आ रही थी

दुर्ग जिले के पुलिस थानों में सालों से खड़े लावारिश और जब्त वाहनों की समस्या का समाधान कर लिया गया है। पुलिस ने एक सुनियोजित, कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए इन वाहनों की नीलामी कराई। इससे शासन को लगभग 77 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त है। यह समस्या लंबे समय से चली आ रही थी, जिससे थानों में जगह घेर रही थी और वाहनों के रखरखाव-सुरक्षा में भी दिक्कतें आ रही थीं। दुर्ग पुलिस ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए नियमों के तहत इन वाहनों के निराकरण की प्रक्रिया शुरू की। कार्रवाई के पहले चरण में सभी लावारिश और जब्त वाहनों की विस्तृत सूची (इन्वेंट्री) तैयार की गई। इसके बाद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, दुर्ग से वाहनों का विवरण प्राप्त किया गया। पंजीयन नंबर, इंजन नंबर और चेसिस नंबर के आधार पर वाहन मालिकों की पहचान की गई। वाहन मालिकों को नोटिस, दस्तावेज दिखाने पर वाहन लौटाए गए संबंधित थानों के माध्यम से वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए गए। जिन मालिकों ने मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए, उन्हें उनके वाहन नियमानुसार सौंप दिए गए। बाकी वाहनों को पुलिस अधिनियम की धारा 28 के तहत जब्त कर केस तैयार किया गया। दस्तावेज न देने वाले वाहनों पर पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई इन मामलों को अनुविभागीय दंडाधिकारी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक सूचना जारी कर दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई। वैध दावा प्रस्तुत करने वालों को उनके वाहन लौटाए गए। इसके बाद भी जो वाहन लावारिश रह गए, उन्हें लावारिश घोषित कर नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। एसडीएम न्यायालय में पेश हुए मामले लावारिश घोषित वाहनों का ऑफसेट मूल्य तय करने के लिए एक समिति गठित की गई। समिति की अनुशंसा के बाद वाहनों को एमएसटीसी वेबसाइट पर नीलामी के लिए पंजीकृत किया गया। इस नीलामी से कुल 76.88 लाख रुपए शासकीय कोष में जमा हुए हैं। सरकारी कोष में जमा हुए 76.88 लाख जिले के सभी थानों से वाहनों को थाना जामुल स्थित यार्ड में एकत्र किया गया। पूरी प्रक्रिया के बाद 2069 वाहनों में से 1820 दोपहिया और चारपहिया वाहनों की नीलामी की गई, जिससे 76,88,648 रुपए की राशि सीधे शासकीय कोष में जमा हुई। 581 वाहन पहले ही लौटाए जा चुके पुलिस के अनुसार अब तक 581 वाहन सुपुर्दनामा पर वाहन मालिकों को दिए जा चुके हैं। शेष बचे वाहनों के ऑफसेट मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही उनकी भी नीलामी की जाएगी।

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