दुर्ग जिले में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विशाल संवैधानिक एवं सांस्कृतिक यात्रा निकाली गई। यह यात्रा भिलाई के जयंती स्टेडियम से शुरू होकर रिसाली के दशहरा मैदान तक पहुंची। इस कार्यक्रम में जिले के समस्त आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनों के लगभग 5 हजार लोग शामिल हुए। यात्रा में शामिल आदिवासी समाज के लोग अपनी परंपरागत वेशभूषा में नृत्य करते हुए नजर आए। रैली में “हसदेव बचाओ” और “जल जंगल जमीन” जैसे संदेश के साथ सभी एकजुट होकर चल रहे थे। आदिवासी मंडल के जिला अध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर ने कहा कि वे यह संदेश देना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों और संस्कृति के संरक्षण के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। वनांचल में रहने वाले आदिवासी भाइयों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह आयोजन किया गया। UN ने 2007 में आदिवासी अधिकारों पर जारी किया था घोषणा पत्र गोंडवाना समिति के अध्यक्ष अशोक कंगाली ने बताया कि 13 अगस्त 2007 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा के 107वें पूर्ण अधिवेशन में आदिवासियों अर्थात मूल निवासियों के अधिकारों के बारे में घोषणा पत्र जारी किया गया था। इसमें कुल 46 अनुच्छेदों में आदिवासी समाज के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं रीति-रिवाज का संरक्षण शामिल है। साथ ही धार्मिक परंपराओं, जीवन निर्वाह के साधनों का विकास, जमीन एवं क्षेत्रीय संसाधनों पर अधिकार, पूर्ण सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण पर रोक तथा शिक्षा और स्वास्थ्य आदि का संरक्षण एवं विकास का प्रावधान किया गया है।


