रांची यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट सभागार में शनिवार को अर्चा साहित्य कला अकादमी के तत्वावधान में आयोजित ‘मोर दैन 100 वाइसेस इन पंचकला संगम’ कार्यक्रम ने समां बांध दिया। झारखंड के 120 से अधिक कलाकारों ने एक ही मंच पर एक साथ आकर 5 महान कवियों के 10 गीतों को सुर दिया। दूई हाते कालेर मंदिरा…, मोमो चित्ते नीति…, उठोगो भारत लक्ष्मी गीत गाकर जीवन दर्शन को बताया। इस अनोखे और अद्भुत नजारे को देखकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ शंखध्वनि, वेद पाठ (गगन देव मिश्र द्वारा) और द्वीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर अभिजीत घोष, पीके लाल, अनिरुद्ध दत्त, डॉ. पम्पा सेन विश्वास, रघुवंश, सिद्धार्थ घोष, अशोक कुमार विश्वास मौजूद रहे। अकादमी के अध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत किया और अनुष्ठान में गाए जाने वाले गीतों की पुस्तक का विमोचन किया। संगीत का निर्देशन डॉ. पम्पा सेन विश्वास व अशोक कुमार विश्वास ने किया। छात्राओं ने राधा-कृष्ण के रास की प्रस्तुति से मोहा मन आरयू परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट की छात्राओं ने वंदे मातरम के साथ, रबिंद्र नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने कृष्ण और राधा के रास की प्रस्तुति दी। जिसमें तनुश्री गांगुली, तनुश्री बनर्जी, अमूल्य, काजल, दिव्या और कृतिका शामिल थी। नृत्य निर्देशन प्रशिक्षक विपुल नायक ने किया। वहीं, दीपांजलि कथक केंद्र, रांची की ओर से लावण्या, सिल्विया, रवैया, रंजना, गरिमा, अगरिया और स्नेही ने रबिंद्र नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य निर्देशन देवज्योति का था। सम्मानित हुए कलाकार, दिखी यूनिफॉर्मिटी इस विशाल संगीत समारोह में शामिल हुए सभी कलाकार एक ही परिधान और एक ही तरह की साड़ी पहने हुए थे, जो मंच पर एक विशेष यूनिफॉर्मिटी पैदा कर रही थी। इन सभी कलाकारों को उनकी बेहतरीन प्रतिभा के लिए पुरस्कृत कर सम्मानित भी किया गया।


