दूर नहीं हो रहा संकट:टेंडर वाले घाटों पर खनन नहीं, अवैध तरीके से बालू निकाल दोगुनी कीमत पर बेच रहे माफिया

रांची में बालू ​की किल्लत जी का जंजाल बन गई है। बालू नहीं मिलने से घरों का निर्माण ठप पड़ गया है। करीब एक दर्जन छोटे-बड़े प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं। पिछले माह झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान बालू पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर बालू की कालाबाजारी कराने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से बालू घाटों का टेंडर जल्द करने और सभी को बालू उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था। लेकिन अभी भी रांची के 19 में से सिर्फ सिल्ली के सुंडिल घाट से बालू निकल रहा है। अधिकारियों की मानें तो बाकी 18 घाटों से बालू का उत्खनन नहीं हो रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि सुदूर क्षेत्रों में स्थित बालू घाटों से धड़ल्ले से अवैध बालू का उत्खनन हो रहा है। बालू माफिया भी पुलिस, नेता, अपराधी को चढ़ावा चढ़ाने का हवाला देते हुए दोगुनी कीमत पर बालू बेच रहे हैं। तीन हजार रुपए में एक टर्बो में लदा 100 सीएफटी बालू मिल रहा था, जो अब सात से आठ हजार रुपए में मिल रहा है। 18 हजार रुपए प्रति हाइवा मिलने वाले बालू के लिए करीब 40 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं। इस वजह से बड़े बिल्डर ही बालू गिरा रहे हैं। ऐसे समझें रांची में चल रहा बालू का खेल… बुंडू और सिल्ली से रोजाना आ रहा बालू बुंडू के कांची नदी, तुजू घाट, कराम्बू घाट, सुटीलौंग घाट, बुढ़ाडीह घाट, बामलाडीह घाटों सहित अन्य छोटे घाटों से रोजाना बालू निकल रहा है। सिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों से भी स्थानीय नेता और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से शहर में बालू लाकर बेचा जा रहा है। खूंटी से भी कर्रा रूट से रोजाना 10 से 20 हाइवा बालू आ रहा है। बालू ट्रक चालकों ने बताया कि उन्हें चालान दिया जा रहा है, लेकिन वह दूसरे घाट का होता है। अवैध बालू उत्खनन में काेई बख्शा नहीं जाएगा अवैध बालू उत्खनन के खिलाफ पुलिस-प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। पिछले दिनाें करीब 50 वाहन जब्त किए गए, प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। अवैध खनन में लगे किसी काे नहीं छाेड़ा जाएगा। – अबु हुसैन, डीएमओ, रांची

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