सुलताना पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे ‘म्युल अकाउंट ऑपरेशन’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाता उपलब्ध करवाने और संगठित तरीके से ठगी करने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी उत्तर भारत में बैठकर दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाते थे। सोशल मीडिया पर ‘पैसा डबल’ करने का झांसा पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अंकित कटेवा और गोविंद सिंह एक संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। ये लोग व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ‘1212’ जैसे ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ते थे। गिरोह के सदस्य मासूम लोगों को USDT (क्रिप्टोकरेंसी) के माध्यम से निवेश करने और कम समय में पैसा दोगुना करने का झांसा देते थे। जैसे ही कोई इनके जाल में फंसता, ये उनसे अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे। लाखों का संदिग्ध ट्रांजेक्शन बरामद पुलिस ने जब पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों की कुंडली खंगाली गई। अंकित कटेवा के खाते में 2,84,005 का संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिला। गोविंद सिंह के खाते में 1,83,000 का ट्रांजेक्शन पाया गया।
एनसीआरबी (NCRB) के समन्वय पोर्टल के अनुसार, इन खातों से जुड़े लिंक के माध्यम से विभिन्न राज्यों के पीड़ितों से कुल 46,03,630 की धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं।
किराये पर लेते थे बैंक खाते और ATM थानाधिकारी रविन्द्र कुमार ने बताया कि
पूछताछ में आरोपी गोविंद सिंह ने खुलासा किया कि उसने अपना बैंक एटीएम अंकित कटेवा को किराये पर दे रखा था। अंकित ने स्वीकार किया कि वह हरियाणा के लोहारू निवासी रवि के साथ मिलकर जान-पहचान वाले लोगों को रुपयों का लालच देकर उनके बैंक खाते किराये पर लेता था और उनका उपयोग साइबर ठगी की राशि छिपाने के लिए करता था। इन राज्यों के लोग हुए शिकार सुलताना पुलिस की इस कार्रवाई से देश के कई राज्यों में सक्रिय इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। गिरोह ने तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, उड़ीसा तथा तेलंगाना के लोगों से ठगी की गई है।


