गुमला से लापता छह साल की बच्ची का सात साल बाद भी सुराग न मिलने पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की कोर्ट ने बुधवार को इस पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाले घुमंतू लोगों के लिए राज्य पर स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। ऐसे लोग जगह-जगह टेंट लगाकर रहते हैं और कई बार आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इसलिए ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए गृह विभाग को स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की जरूरी हे। पुलिस को भी ऐसे लोगों की पहचान की जांच करनी चाहिए, जिससे भविष्य में बच्चों की तस्करी जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। इससे पहले कोर्ट के आदेश पर पेश हुए गुमला एसपी हारिस बिन जमा ने बताया कि इस मामले में जांच जारी है। उन्होंने प्रभार लेने के बाद नई एसआईटी बनाई है। एसआईटी ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी की है। दिल्ली में भी अपहृत बच्ची की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया है। जगह-जगह बच्ची की तस्वीर लगाई गई है। लेकिन अब तक बच्ची का पता नहीं चला है। पुलिस की जांच जारी है। इसके बाद ही कोर्ट ने घुमंतू लोगों के लिए गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई में गृह सचिव को ऑनलाइन उपस्थित होने का निर्देश दिया। बच्चों की तस्करी के पीछे गुलगुलिया गैंग, रेकी के बाद गायब कर देता है बच्चे बच्चों की तस्करी के पीछे गुलगुलिया गैंग का हाथ सामने आ रहा है। यह गैंग सर्दी के मौसम में पहुंचा है। खाली मैदान या सुनसान स्थान पर तंबू लगाकर रहता है। अपने बच्चों से चौक-चौराहों पर करतब दिखाकर कमाई करता है। वहीं गैंग के कुछ लोग घरों में चोरी और मानव तस्करी के लिए बच्चों की रेकी करता है। फिर मौका मिलते ही बच्चे को गायब कर देता है। हाल ही में पुलिस ने 12 बच्चों को बरामद कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें भी गुलगुलिया गैंग का ही नाम आया था।


