झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को नगर निकाय चुनाव में मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष के पद में आरक्षण रोस्टर का सही से पालन नहीं किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि ऐसा क्यों किया गया। अदालत ने इससे संबंधित जवाब शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने चक्रधरपुर में निर्धारित आरक्षण के खिलाफ दाखिल याचिका को इस मामले के साथ टैग कर दिया। इसमें एसटी के लिए पद आरक्षित करने का मुद्दा उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि उस क्षेत्र में मात्र 8 प्रतिशत एसटी की आबादी है। ऐसे में एसटी के लिए पद आरक्षित करना उचित नहीं है। अदालत ने दोनों मामले में अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की है। इस संबंध में उपेंद्र कुमार और अन्य की ओर से याचिका दाखिल की गई है। प्रार्थियों की आेर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने शहरी निकाय चुनाव में आरक्षण के लिए नई नियमावली बनाई है। लेकिन, इसमें संविधान के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। निर्वाचन आयोग ने आरक्षण रोस्टर को सही ठहराया इधर, प्रार्थी की ओर से बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 243 (टी) के तहत निर्धारित रोस्टर में सबसे पहले अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), पिछड़ा वर्ग (बीसी ) और महिला के लिए पद आरक्षित किया जाना है। लेकिन, सरकार की ओर से जारी आरक्षण रोस्टर में अनुसूचित जनजाति (एसटी ) को पहले रखा गया है। ऐसा करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसके जवाब में राज्य निर्वाचन आयोग की आेर से कहा गया कि सरकार का निर्णय उचित है। जनसंख्या के आधार पर आरक्षण के लिए रोस्टर तय किया गया है। सरकार को ऐसा करने का अधिकार भी है। कोर्ट के फैसले से प्रभावित हो सकता है नगर निकाय चुनाव हाईकोर्ट में नगर निकाय चुनाव के लिए मेयर-जिला परिषद अध्यक्ष के पदों के आरक्षण के खिलाफ चार याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने पूर्व में दाखिल दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उसे सुरक्षित रखा है। आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं करने के खिलाफ उपेन्द्र एवं अन्य की याचिका पर अदालत ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई इसी माह होगी। निर्वाचन आयोग द्वारा तय आरक्षण रोस्टर को गलत ठहराया जाता है तो नगर निकाय चुनाव पर असर दिखेगा।


