दूसरों को ही देखने में समय न गवाएं, खुद को सुधारें और जीवन को संवारें: मुनि वीरभद्र

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में जारी चातुर्मासिक प्रवचन में शुक्रवार को जैन संत मुनि विनय कुशल श्रीजी के शिष्य मुनि वीरभद्र (विराग) श्रीजी ने जैन रामायण की कथा सुनाते हुए कहा कि हम इस दुनिया में आए हैं अपना-अपना रोल निभाने, किन्तु क्या हमने अपना रोल परफेक्ट निभाया?। कहा कि भगवान राम ने अपना रोल परफेक्ट निभाया इसलिए वे इतिहास में अजर अमर हो गए। कहा कि हम दूसरों को देखते हैं कि उसने क्या किया, उसने कैसा किया, उसने ऐसा किया, उसने वैसा किया आदि आदि, किंतु हम अपने को नहीं देखते कि हमने क्या किया। हम यदि अपने को देखें और उसमें सुधार लाएं हैं तो हम भी अमर पात्र हो सकते हैं। हम दूसरों को ही देखने लगते हैं और उसी में अपना समय बिता देते हैं, ऐसे में हमें अपने आपको सुधारने का समय कब मिलेगा। मुनिश्री ने कहा कि हर पात्र के जीवन में बदलाव आता है, जरूरत है उस बदलाव का फायदा उठाकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ने की। व्यक्ति थोड़ा सा बदलाव पाकर विचलित हो जाता है और चरित्र (संन्यास) लेने की सोचने लगता है। कहा कि जीवन में हर प्रकार की स्थिति आती है।

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