देर रात तक 5 कंटेनर लोड:हर 30 मिनट में बदल जाती है टीम, पीपीई किट उतारते ही बीपी की जांच की जा रही

भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के गोदाम में रखा 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा 12 कंटेनर में एक साथ पीथमपुर ले जाने की तैयारी मंगलवार रात को लगभग पूरी कर ली गई। अब सिर्फ इंतजार है तो पुलिस बल का। गैस राहत विभाग के अफसरों ने बताया कि यहां पर कचरे की पैकिंग में लगे श्रमिकों की टीम को हर 30 मिनट में बदल दिया जा रहा है। जैसे ही वे पीपीई किट उतारते हैं, उनका हेल्पचेकअप किया जाता है। अस्थाई अस्पताल में डॉक्टर्स की टीम मौजूद है। यहां पर उनके खाना-खाने और नहाने तक के इंतजाम किए गए हैं। यहां पर मजदूर और अफसरों ने जिन बोतलों में पानी पिया उसे भी ले जाया जाएगा। बताया जाता है कि हर कंटेनर में औसतन 30 टन कचरा भरा जा रहा है। 200 से ज्यादा श्रमिक कचरा लोड कर रहे हैं। देर रात तक 5 कंटेनर लोड हो चुके थे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। भोपाल गैस त्रासदी राहत-पुनर्वास के संचालक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ 12 कंटेनरों से कचरा भेजा जाएगा। 50 किमी/घंटे की स्पीड से चलेंगे कंटेनर
कचरा ले जाने वाले विशेष कंटेनर लगभग 50 किमी प्रति घंटा की स्पीड से चलेंगे। इन्हें पीथमपुर भेजने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। तैयारी के लिए मंगलवार को उच्च अधिकारियों की बैठक भी हुई। इस ग्रीन कॉरिडोर में यह भी तय किया जाएगा कि रास्ते में इन्हें कब, कहां और कितनी देर के लिए रोका जाएगा। इसके अलावा कंटेनर्स के साथ पुलिस सुरक्षा बल, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और क्विक रिस्पांस टीम रहेगी। हर कंटेनर में दो ड्राइवर रखे गए हैं। धार जिले के पीथमपुर में एकमात्र प्लांट
संचालक ने बताया कि एमपी में औद्योगिक इकाइयों में निकलने वाले रासायनिक तथा अन्य अपशिष्ट के निष्पादन के लिये धार जिले के पीथमपुर में एकमात्र प्लांट है, जहां पर कचरे को जलाने काम किया जाता है। यह प्लांट सेन्ट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशानुसार संचालित है। सुरक्षा में पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड… कंटेनर्स के साथ पुलिस सुरक्षा बल, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड तथा क्विक रिस्पांस टीम रहेगी। यह कंटेनर लीक प्रूफ एवं फायर रेजिस्टेंट हैं। प्रति कंटेनर 2 प्रशिक्षित ड्राइवर नियुक्त किए गये हैं। इन कंटेनरों का मूवमेंट जीपीएस द्वारा मॉनिटर किया जायेगा। अपशिष्ट का परिवहन भोपाल से पीथमपुर टीएसडीएफ तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किया जाएगा।

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