देवघर नगर को रोग व्याधि आदि से मुक्त बनाए रखने के लिए गमाली पूजा सालों से की जाती है। यह पूजा तीन दिवसीय होती है। जिसकी शुरुआत रविवार से हो गई। तीन दिन तक चलने वाली इस पूजा के दौरान बाबा मंदिर परिसर स्थित मां काली, मां शीतला सहित तमाम देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इस पूजा में मुख्यत: मां काली की पूजा होती है। इस पूजा को लेकर कई मान्यताएं भी हैं। पंडा धर्म रक्षिणी सभा के पूर्व महामंत्री और पंडा दुर्लभ मिश्रा के मुताबिक तीन दिवसीय यह पूजा वैदिक और तांत्रिक दोनों ही विधि से की जाती है। तीन दिन के दौरान अलग-अलग प्रक्रिया की जाती है। नगर बंधन होता है। शरबत का प्रसाद चढ़ता है। कुमारी और बटुक का भोजन होता है। कुमारी को देवी का स्वरूप माना जाता है और बटुक को भैरव के स्वरूप में पूजा जाता है। फिर हवन आदि होता है। इस हवन में उन वस्तुओं का इस्तेमाल होता है जो प्रकृति से हमें मिलता है। इनके जलने से वातावरण शुद्ध होता है। देवघर से सटे हर गांव में होती है पूजा उन्होंने बताया कि देवघर में होने वाली पूजा के प्रारूप के मुताबिक क्षेत्र के अन्य गावों में भादो महीने तक यह पूजा चलती है। चैत कृष्ण पक्ष के प्रथम मंगलवार या द्वितीय मंगलवार के बीच इस पूजा की शुरुआत होती है, जिसे धीरे-धीरे सभी गांव वाले अपने-अपने गांव में मनाते हैं। बताया कि इस पूजा में वैदिक और तांत्रिक दोनों ही पद्धतियों का समावेश होता है। रविवार से इस पूजा की विधिवत शुरुआत हुई। पहले दिन नगर बंधन किया गया। इसके बाद देवी को दूध, दही, घी सहित अन्य वस्तुओं से बनाया गया शरबत चढ़ाया गया। ऐसी मान्यता है कि नगर बंधन कार्यक्रम से पूजा की समाप्ति तक नगर से बाहर जाना या अंदर आने की मनाही होती है। चूंकि देवी की पूजा गांव के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए होती है, ऐसे में माना जाता है कि गांव में बाहरी के प्रवेश से पूजा में विघ्न होगा और बीमारियां भी प्रवेश करेंगी। आज निकलेगी भव्य शोभायात्रा तीन दिन के निर्धारित कार्यक्रम के तहत आज दूसरे दिन मां शीतला को निमंत्रण दिया जाएगा। इसके लिए भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। आज शाम को पंडा धर्म रक्षिणी सभा के अध्यक्ष डॉ सुरेश भारद्वाज व महामंत्री निर्मल झा के नेतृत्व में ढोल-बाजे के साथ नाचते गाते, हाथों में ध्वजा लेकर शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा बाबा मंदिर की परिक्रमा कर पूरब दरवाजा से बड़ा बाजार होते हुए आजाद चौक स्थित मां शीतला मंदिर पहुंचेगी। जहां मां को निमंत्रण दिया जाएगा। इससे पहले आज दिन भर महिला और पुरुष भक्तों के द्वारा नगर कल्याणार्थ मां काली को गंगाजल, दही व गुड़ का विशेष शरबत को चढ़ाया गया। जिसको लेकर सुबह से ही लोगों की भीड़ मां काली के मंदिर में लगी हुई थी। मंगलवार को होगी विशेष पूजा तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने बताया कि माता को नगर गमाली पूजा को लेकर शहरवासी एवं पंडा समाज की महिलाएं दही गुड़ गंगाजल आदि से शरबत बनाकर माता को परंपरा के अनुसार शरबत अर्पित किया। साथ ही नगर बंधन की प्रक्रिया के बाद मंगलवार को माता की विशेष पूजा होगी। शहर के प्रत्येक घर में धूमन जलाया जाएगा। माता की विशेष पूजा अर्चना करते हुए उनसे रोग मुक्त एवं विश्व कल्याण की कामना की जाती है। वहीं मंदिर परिसर में मां काली मंदिर के पास बड़ा हवन कुंड बनाया जाता है। इस हवन कुंड में स्थानीय लोग जलते आग में धूमन डाल कर बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करते हैं।


