राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर ऋषभदेवजी में एक बार फिर ऑनलाइन दर्शन की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके तहत भक्त 24 घंटे कभी भी प्रभु के दर्शन कर सकेंगे। साथ ही ऑनलाइन दान की व्यवस्था भी शुरू की जाएगी, जिससे जो भक्त मंदिर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे घर बैठे दान भेज सकेंगे। इसके लिए देवस्थान विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंडर के तहत साइट मैनेजमेंट, कैमरे लगाने सहित अन्य तकनीकी कार्य किए जाएंगे। यह व्यवस्था 5 साल के लिए होगी, जिस पर विभाग करीब 4 लाख 50 हजार रुपए खर्च करेगा। बता दें कि ऋषभदेवजी (आदिनाथ) की खासियत यह है कि वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और संस्थापक हैं, जिन्होंने मानवता को कृषि, शिल्प, वाणिज्य, विद्या जैसे जीवन उपयोगी कलाएं सिखाईं। आदिवासी भी इनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इसमें उनकी भी काफी आस्था है। मान्यताओं के अनुसार ऋषभदेवजी मंदिर का निर्माण 874 ईस्वी (विक्रम संवत 931) में मेवाड़ के शासक रावल खुमाण के शासनकाल के दौरान हुआ था। 2018 में हुई थी शुरुआत, बजट की कमी से बंद हुआ प्रोजेक्ट देवस्थान विभाग ने प्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2018 में ऋषभदेवजी और गोगामेड़ी मंदिर में ऑनलाइन दर्शन की शुरुआत की थी। उस समय भी 5 साल के लिए टेंडर दिया गया था, जिसकी अवधि 2023 में पूरी हो गई थी। कोविड के दौर में भक्तों ने सबसे ज्यादा ऑनलाइन दर्शन किए थे। बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण यह प्रोजेक्ट बीच में बंद हो गया था। अब सरकार से बजट मिलने के बाद विभाग ने दोबारा ऑनलाइन दर्शन शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। नए टेंडर के तहत 2031 तक व्यवस्था की देखरेख की जाएगी। इससे भक्तों को घर बैठे दर्शन हो सकेंगे।


