उदयपुर शहर में भविष्य के पेजयल संकट से निपटने के प्लान को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देवास-तृतीय एवं देवास-चतुर्थ जलापूर्ति परियोजनाओं से स्टेज-1 स्वीकृति मिल गई है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने इस प्रोजेक्ट को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकता बनाते हुए लगातार मॉनिटरिंग की। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई स्तरों पर संवाद कर वर्षों से लंबित वन स्वीकृति की प्रक्रिया को गति देने के बाद अब इसकी स्वीकृति हो गई है। कटारिया ने बताया कि यह उदयपुर के लिए बड़ी बात है। जल संसाधन विभाग उदयपुर के अधीक्षण अभियंता मनोज जैन ने बताया कि देवास-तृतीय परियोजना के अंतर्गत गोगुन्दा तहसील के नाथियाथल गांव के समीप 703 एमसीएफटी क्षमता का बांध निर्मित किया जाएगा। यहां से 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग द्वारा जल को देवास-द्वितीय (आकोड़दा बांध) तक लाया जाएगा और फिर मौजूदा प्रणाली से पिछोला झील तक पानी पहुंचाया जाएगा। वहीं देवास-चतुर्थ परियोजना के तहत अम्बा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनेगा, जिसे 4.15 किलोमीटर की सुरंग से देवास-तृतीय से जोड़ा जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उदयपुर शहर को आने वाले कई दशकों तक निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही पिछोला, फतहसागर और स्वरूपसागर जैसी ऐतिहासिक झीलों का जलस्तर स्थायी रूप से बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया जीवन मिलेगा। कटारिया बोले पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा स्टेज वन स्वीकृति मिलने पर गुलाबचंद कटारिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उदयपुर की झीलें केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। इन परियोजनाओं से पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा और झीलों की ऐतिहासिक गरिमा भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने इस कार्य में सहयोग देने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया। अब स्टेज-2 पर काम होगा
अधीक्षण अभियंता मनोज जैन ने बताया कि अब इसमें आगे स्टेज-2 की स्वीकृति होगी एक तरह से फाईनल स्वीकृति होगी। हमे जो स्टेज-3 की स्वीकृति मिली है इसमें अब जो क्षतिपूर्ति राशि निकाली जाएगी उसको जमा कराया जाएगा इसके बाद स्टेज-2 की स्वीकृति मिल जाएगी।


