देवास में धरना देने रेलवे ट्रैक पर पहुंचे ग्रामीण:अंडरब्रिज की मांग, खेत-श्मशान जाने को 20KM लंबा चक्कर; पुलिस-रेलवे ने रोका आंदोलन

देवास जिले की ग्राम पंचायत अजीतखेड़ी के ग्रामीण बुधवार को रेलवे अंडरब्रिज की सालों पुरानी मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। रेल रोकने की आशंका को देखते हुए पहले से ही रेलवे और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और ग्रामीणों को समझाइश देकर आंदोलन शांत कराया। ग्रामीणों ने एक दिन पहले मंगलवार को जनसुनवाई में अंडरब्रिज की मांग को लेकर आवेदन दिया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे रेलवे ट्रैक पर आंदोलन करेंगे। इसी कड़ी में बुधवार को ग्रामीण ट्रैक के पास एकत्र हुए। गांव दो हिस्सों में बंटा, खेतों तक नहीं रास्ता ग्राम पंचायत अजीतखेड़ी के सरपंच प्रभु सिंह सोलंकी ने बताया कि देवास-मक्सी रेलवे लाइन गांव की आबादी के बीच से गुजरती है, जिससे गांव दो हिस्सों में बंट गया है। रेलवे लाइन के दूसरी ओर किसानों की कृषि भूमि है, लेकिन वहां पहुंचने के लिए न तो सुरक्षित अंडरब्रिज है और न ही कोई ऑप्शनल मार्ग। 10-11 साल से बंद पड़ा पुराना पुल सरपंच के अनुसार, पहले बना पुल पिछले 10–11 वर्षों से बंद है। पुल के नीचे गंदे नाले का पानी भरा रहता है, जिससे आवागमन संभव नहीं है। रेलवे लाइन के उस पार करीब 70–80 सर्वे नंबरों की कृषि भूमि है, जहां पहुंचने के लिए किसानों को 20-21 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। खेती और अंतिम संस्कार में परेशानी ग्रामीणों ने बताया कि लंबा चक्कर लगाने के कारण कई किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। इसके अलावा श्मशान घाट भी रेलवे लाइन के उस पार है, जिससे अंतिम संस्कार के समय भी भारी दिक्कत होती है। रेलवे लाइन के कारण प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़क भी आधी-अधूरी रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर वे दो बार रेलवे विभाग रतलाम, कलेक्टर, सांसद और विधायक को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। रेलवे का आश्वासन- स्वीकृति के बाद होगी कार्रवाई रेलवे के सीनियर इंजीनियर शुशांत भारती ने बताया कि ग्रामीण रेलवे ट्रैक के नीचे अंडरपास की मांग कर रहे हैं। सरपंच और विधायक के माध्यम से आवेदन रतलाम मंडल भेजा गया है, जहां से प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और फिलहाल ऑप्शनल व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।

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