पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने रेलवे आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश का पहला स्वचालित लोको धुलाई प्लांट कोटा मंडल के टीकेडी विद्युत लोको शेड में स्थापित किया गया है। इस अत्याधुनिक प्लांट का सफल परीक्षण किया गया, जिसमें दो विद्युत इंजनों की धुलाई कर कार्यक्षमता परखी गई। प्लांट का विधिवत कमीशनिंग कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा।
पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत स्थापित यह परियोजना लगभग 1.74 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने बताया कि यह प्लांट अत्यंत प्रभावी परिचालन क्षमता रखता है। एक इंजन की धुलाई में अधिकतम 10 मिनट का समय लगता है और वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रतिदिन कम से कम 25 इंजनों की धुलाई संभव है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू जल संरक्षण है। प्रति इंजन अधिकतम 350 लीटर ताजे जल का उपयोग किया जाता है, जबकि इस्तेमाल किए गए जल का 75 से 80 प्रतिशत पुनर्चक्रित किया जाता है। इस उद्देश्य से 20,000 लीटर क्षमता की भूमिगत जल भंडारण टंकी के साथ 10,000-10,000 लीटर क्षमता के सॉफ्ट वाटर और पुनर्चक्रित जल टैंक स्थापित किए गए हैं। प्लांट में डिटर्जेंट यूनिट, ब्रशिंग यूनिट, वॉश-ऑफ यूनिट, जल शोधन और अपशिष्ट जल शोधन जैसी प्रणालियां लगाई गई हैं। जल शोधन के लिए 200 लीटर की रेजिन टंकी और अपशिष्ट जल शोधन के लिए 200 लीटर की रासायनिक टंकी की व्यवस्था की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर्यावरण-अनुकूल बनी रहे।


