वाहेगुरु पुरा गांव (बरनाला) के युवा किसान अमृत चाहल का देसी बीज और प्राकृतिक खेती पर आधारित व्यावसायिक मॉडल स्थिरता एवं लाभप्रदता का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। उन्होंने बेंगलुरू की अन्नादना सॉइल एंड सीड सेवर्स नामक संस्था के सहयोग से वर्ष 2023 में देसी बीज बैंक की स्थापना की है। इसका उद्देश्य पारंपरिक, स्थानीय बीजों को संरक्षित करना, जो वर्षों से उच्च उत्पादक वैरायटी (एचवाईवी) और संकर बीजों के कारण लुप्त हो रहे थे। उन्होंने 2018-19 में लुधियाना स्थित पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी और 2022 में बेंगलुरू की उक्त संस्था से बीज संरक्षण की ट्रेनिंग ली। उनके बीज बैंक में टमाटर, मिर्च, बैंगन, शलगम, मूली, घीया, तौरी समेत तमाम तरह की सब्जियों के अलावा गेहूं, धान, हरा चारा, बाजरा, मक्की आदि के पुराने देसी बीज शामिल हैं। उनके पास 35-40 फसलों की 150 किस्मों के बीज हैं। वह बरनाला ब्लॉक नेचुरल फार्मर्स एसोसिएशन (रजि.) के प्रधान हैं। इस संगठन के सभी 32 सदस्य जैविक खेती करने के लिए नोडल एजेंसी पंजाब एग्रो से प्रमाणित हैं। 36 वर्षीय चाहल ने 2012 में पीटीयू से डिस्टेंस मोड में बीएससी (कंप्यूटर साइंस) की। वह वर्ष 2009 से ही स्थानीय किसान क्लब के सदस्य रहे हैं। वह 2015 से प्राकृतिक खेती के मामले में काम करने लगे। लोगों को जहरमुक्त खेती उत्पाद मिले, इसके लिए सीधे उपभोक्ता तक पहुंच का मॉडल अपनाया है। वह और उनके साथी बरनाला में हर शनिवार सुबह 10 से सायं 5 बजे तक किसान हट और बुधवार को दोपहर 3 से सायं 6 बजे तक जैविक मंडी में अपने उत्पाद लेकर पहुंचते हैं। वहीं, कृषि मेलों और अन्य आयोजनों में भी जैविक उत्पाद बेचते हैं। वह ज्ञान बांटने के लिए अक्टूबर एवं फरवरी में वर्कशॉप लगाते हैं। बाहरी सदस्यों के लिए इसकी फीस 1000 रुपए रखी है। आगामी 25 दिसंबर को भी एक दिवसीय वर्कशॉप लगा रहे हैं। उनका प्रयास है कि पंजाब की खेती की पहचान रासायनिक संकट से निकलकर प्राकृतिक समृद्धि की ओर बढ़े। बरनाला के अमृत चाहल ने देसी बीज, प्राकृतिक खेती को बनाया मॉडल आप भी किसान हैं और खेती में ऐसे नवाचार किए हैं जो सभी के लिए उपयोगी हैं, तो डिटेल और फोटो-वीडियो हमें अपने नाम-पते के साथ 9464579710 पर सिर्फ वॉट्सएप करें। यह स्टोरी दूसरों से भी शेयर करें प्रगतिशील किसान अमृत चाहल से और जानने को डायल करें 94174-85067 अमृत चाहल अपने बीज बैंक में।


