देहरा में कश्मीरी युवक से विवाद में खुलासा:रुपयों के लेनदेन को लेकर हुआ विवाद, आपसी सहमति से दोनों पक्षों ने निपटाया

कांगड़ा जिले के देहरा क्षेत्र में कश्मीरी शॉल विक्रेता जहांगीर अहमद शेख से जुड़े एक विवाद में नए तथ्य सामने आए हैं। पुलिस जांच के अनुसार, यह घटना शॉल बिक्री के दौरान लेन-देन को लेकर हुए आपसी झगड़े से संबंधित थी, जिसे दोनों पक्षों ने बाद में आपसी सहमति से सुलझा लिया। देहरा पुलिस को सिविल अस्पताल देहरा से एक घायल व्यक्ति के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि इस घटना में कांगड़ा जिले के देहरा निवासी हमीर चंद और जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा निवासी जहांगीर अहमद शेख शामिल थे। 32 वर्षीय जहांगीर अहमद शेख पेशे से शॉल विक्रेता हैं और पिछले 17 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में बताया कि शॉल बेचने के दौरान सौदे और भुगतान को लेकर हमीर चंद के साथ उनका विवाद हो गया था, जो बाद में बढ़ गया। दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता हालांकि, दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत और समझाइश के बाद इस विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त कर लिया। पुलिस ने बताया कि दोनों व्यक्तियों ने आगे किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई न करने की इच्छा व्यक्त की है। मेडिकल प्रक्रिया पूरी की जा रही है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। वर्तमान में क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। बता दें कि, इससे पहले इस घटना को लेकर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था और मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। उत्तराखंड के कपड़ा विक्रेता से भी हुआ था हमला इसी क्रम में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हुए हमले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सख्त नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि कश्मीरी व्यापारी भी देश के समान नागरिक हैं और उन्हें भारत में कहीं भी काम करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति एवं सौहार्द बनाए रखें। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी क्षेत्र में अशांति फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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