दोआबा से अमेरिका तक के सफर में दिखा अपनी मिट्टी से बिछड़ने का दर्द

जालंधर| प्रगतिशील लेखक संघ और साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था फुलकारी के सहयोग से देश भगत यादगार हाल में शायर कुलवंत सेखों के साथ एक विशेष रू-ब-रू कार्यक्रम और कवि दरबार करवाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मक्खन मान ने रूपरेखा साझा की, जबकि महासचिव भगवंत रसूलपुरी ने अतिथियों का स्वागत किया। शायर कुलवंत सेखों ने अपने जीवन और साहित्यिक सफर पर चर्चा करते हुए कहा कि दोआबा से अमेरिका तक का उनका सफर संघर्षपूर्ण रहा है और उनकी शायरी में अपनी मिट्टी से बिछड़ने का दर्द साफ झलकता है। उन्होंने अपनी चुनिंदा कविताएं और गजलें भी श्रोताओं के साथ साझा कीं। कार्यक्रम के दूसरे चरण में राकेश आनंद के संचालन में कवि दरबार सजाया गया, जिसमें मोहन मतियालवी, विशाल, रूप दबुर्जी, सुरजीत साजन, सरोज, नकाश चित्तेवाणी, संदीप मनन और जुगिंदर संधू सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से रंग जमाया। अध्यक्षता कर रहे कुलदीप सिंह बेदी ने कहा कि कुलवंत सेखों के बहाने आज प्रवास के मुद्दों और अपनी मिट्टी के प्रति लगाव पर सार्थक चर्चा हुई है।

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