बोकारो के महुआटांड़ के लुगु पहाड़ पर 21 अप्रैल को पुलिस से मुठभेड़ में भी शामिल रहा दो लाख रुपए के इनामी और 10 साल से फरार कुख्यात नक्सली भोला कोड़ा ने मुंगेर एसपी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वह विकास दा और रोहित कोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। भोला कोड़ा लड़ैयाटांड के पेसरा गांव का रहने वाला है। उसने रविवार की रात राज्य सरकार के आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर किया। भोला कोड़ा नक्सली कमांडर प्रवेश दा उर्फ परवेज दा के दस्ते का सक्रिय सदस्य रहा है। वह कई नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। नक्सली को मिलेगी 8.10 लाख की वित्तीय सहायता: उग्रवादियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वासन नीति के तहत देय अन्य सुविधाओं के अलावा नक्सली भोला कोड़ा को 2 लाख की इनामी राशि, 2.5 लाख की सहायता राशि और 36 महीने तक हर माह 10 हजार रुपए का प्रशिक्षण भत्ता अधिकतम 36 माह तक मिलेगा। पुलिस के पास नक्सली ने एक देशी पिस्टल, एक मैगजीन, तीन पॉकेट डायरी, एक नक्सली कॉपी, एक टूटी घड़ी, एक छोटा टॉर्च, मोबाइल, दो पेन ड्राइव, 40 मेमोरी कार्ड, एक कैमरा और तीन मेडिसिन बॉक्स जमा किए। कजरा के इमलिया कोल में वाहन जलाने की घटना में रहा है शामिल भोला कोड़ा 2021 में लखीसराय के कजरा थाना क्षेत्र के इमलिया कोल में सड़क निर्माण के दौरान लेवी नहीं देने पर कार्य में लगे मजदूरों को भगाने और वाहन जलाने की घटना में शामिल था। 21 अप्रैल, 2025 को बोकारो के महुआटांड़ थाना क्षेत्र के लुगु पहाड़ में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में भी शामिल था। इस मुठभेड़ में जमुई के अरविंद यादव उर्फ अविनाश, लखीसराय के टुन्नीलाल कोड़ा, झारखंड के प्रयाग मांझी उर्फ विवेक, साहेब राम मांझी समेत 4 अन्य नक्सली मारे गए थे। भोला कोड़ा पर लड़ैयाटांड, खड़गपुर, कजरा, बरहट, महुआटांड़, गोमिया और पीरी बाजार थानों में कुल 8 संगीन एवं जघन्य मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, पुलिस पर हमला, देशद्रोह, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की धाराएं लगी हैं।


