जयपुर के द पैलेस स्कूल में विश्व कला दिवस और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। एक सप्ताह तक चले इस कार्यक्रम में स्टूडेंट्स ने कला के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। स्कूल की प्रिंसिपल उर्वशी वार्मन के मार्गदर्शन में विशेष कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें मार्बलिंग आर्ट गतिविधि का विशेष आकर्षण रहा। स्टूडेंट्स ने सफेद मग को रंग-बिरंगे पानी में डुबोकर अनूठे डिजाइन बनाए। यह गतिविधि व्यक्तित्व की विविधता को दर्शाती है। कार्यक्रम में फॉरगिवनेस ट्री जैसी गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इसमें बच्चों ने नकारात्मक भावनाओं को पहचाना और उन्हें माफी के जरिए सकारात्मकता में बदला। मंडला कला और माइंडफुलनेस जर्नल के माध्यम से स्टूडेंट्स ने आत्म-देखभाल और भावनात्मक सशक्तिकरण को समझा। स्टूडेंट्स ने मंडला के छोटे-छोटे डिजाइन बनाकर एक भव्य सामूहिक चित्र तैयार किया। यह ‘एकता में विविधता’ का उदाहरण बना। इस पूरे आयोजन ने साबित किया कि कला केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह कार्यक्रम शिक्षा में रचनात्मकता और संवेदनशीलता के महत्व को दर्शाता है। इससे स्टूडेंट्स का न केवल अकादमिक बल्कि भावनात्मक विकास भी होता है। स्कूल प्रिंसिपल उर्वशी वॉर्मन ने स्टूडेंट्स द्वारा किये गए प्रयास और उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैसे हर मग ने एक अलग छवि अपनाई, वैसे ही हर बच्चा अपनी पहचान के साथ खास है। यही विविधता, यही अनोखापन हमारी असली ताकत है।


