भरतपुर। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ जिला शाखा भरतपुर द्वारा महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दिया। अध्यक्षता महासंघ के संरक्षक हेमराज सिंह सिनसिनवार ने की। महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पीएफआरडीए अधिनियम को निरस्त करे। राज्य कर्मचारियों के 53 हजार करोड़ रुपए जीपीएफ खाते में जमा किया जाएं, पुरानी पेंशन योजना यथावत रखी जाए, कोरोना काल में रोके गए जनवरी 2020 से जून 2021 तक के महंगाई भत्ते के एरियर का नकद भुगतान किया जाए, सेवाकाल में पांच पदोन्नति के अवसर दिए जाए तथा 7- 14 -21-28 एवं 32 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति पद का वेतनमान स्वीकृत की जाए। ग्रामीण क्षेत्र में सेवारत कार्मिकों को मूल वेतन का 10 प्रतिशत ग्रामीण भत्ता स्वीकृत किया जाए। सहायक कर्मचारी को एमटीएस घोषित करते हुए न्यूनतम वेतन 26000 किया जाए। महासंघ के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने कहा कि मंत्रालयिक कर्मचारियों को शासन सचिवालय के समान वेतन भत्ते पदोन्नति व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं। विरोध प्रदर्शन व धरना का संचालन महासंघ के सलाहकार अनिल भारद्वाज ने किया। महासंघ के जिला मंत्री भूदेव छौंकर द्वारा कार्मिकों के स्वास्थ्य एवं उपचार हेतु जारी आरजीएचएस कटौती को बंद किए जाने की मांग की । मीडिया प्रभारी प्रेम मंगल व एनपीएस के प्रदेश कोऑर्डिनेटर विनोद चौधरी ने ठेका कॉन्ट्रेक्ट नियुक्ति बंद कर कॉन्ट्रेक्ट पर नियुक्त किए गए कार्मिकों को नियमित किया जाने की मांग की। संभागीय मुख्यालय भरतपुर शहर में कार्यरत कर्मचारियों को अन्य संभाग मुख्यालय के समान वाई श्रेणी का दर्जा देते हुए 10% के स्थान पर 20% मकान किराया भत्ता स्वीकृत किए जाने की मांग की।


