बीकानेर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रह चुके धर्मेंद्र के निधन(24 नवंबर) के 4 दिन गुजर चुके हैं। इसके बाद भी बीकानेर शहर और देहात इकाई के मुख्यालय पर अभी तक एक शोकसभा तक का आयोजन नहीं हुआ है। बतौर सांसद धर्मेंद्र के निजी सचिव और प्रतिनिधि रहे भाजपा नेता कमल व्यास ने इसे पार्टी की संवेदनहीनता बताया है। व्यास का कहना है- जिस शख्स ने बीकानेर में भाजपा को स्थापित करने के लिए अपने बॉलीवुड करियर को दांव पर लगा दिया था, उस धर्मेंद्र के लिए स्थानीय शहर और देहात इकाई के पास एक शोक सभा तक करने का भी समय नहीं है। जबकि उन्होंने आजादी के बाद बीकानेर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। ऐसे में पार्टी को एक शोक सभा शीघ्र ही आयोजित करनी चाहिए। वहीं पार्टी के शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ का कहना है- अभी तो सभी के घर में शादियां चल रही है। जल्द ही धर्मेंद्र के लिए शोकसभा रखेंगे। वैसे सोशल मीडिया पर सभी धर्मेंद्र के प्रति शोक व्यक्त कर ही रहे हैं। डूडी के सामने लड़ा था चुनाव
साल 2004 में कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद रामेश्वर डूडी को फिर से मैदान में उतारा तो भाजपा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को प्रत्याशी बना दिया था। जाट वोट बैंक पर तगड़ा उम्मीदवार सामने आने के बाद भी रामेश्वर डूडी ने धर्मेंद्र को कड़ी टक्कर दी। अंत में जब धर्मेंद्र और डूडी के बीच मुकाबला कांटे का हो गया तो धर्मेंद्र ने बेटों सनी और बॉबी देओल को बीकानेर बुलाया था। इन दोनों ने रेलवे स्टेडियम में एक जनसभा की थी। इसके बाद शहरी क्षेत्र में माहौल बदल गया और धर्मेंद्र 57 हजार वोटों से चुनाव जीत गए थे। खास बात यह थी कि बीकानेर शहर के अलावा सभी सीटों से धर्मेंद्र पीछे रहे थे। अकेले बीकानेर शहर से इतनी लंबी लीड ली थी कि सभी पांच विधानसभा सीटों का अंतर बराबर कर दिया था। सूरसागर सहित कई बड़ी समस्याओं को निपटाने के लिए धर्मेंद्र ने प्रयास भी किए और सफलता भी मिली। खास बात ये है कि भाजपा को बीकानेर लोकसभा सीट पर जीत भी धर्मेंद्र के कारण ही मिली थी। 4 दिन बाद भी शोक सभा का आयोजन नहीं पूर्व सांसद की मृत्यु के 4 दिन बाद भी शहर और देहात भाजपा ने एक शोक सभा तक का आयोजन नहीं किया। सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट लगाकर हर किसी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। भाजपा का बड़ा कार्यालय यहां गांधी नगर में बना हुआ है। हर छोटी-बड़ी जीत पर यहां खुशियां मनाई जाती है, मिठाई वितरित होती है। बिहार चुनाव में जीत पर भी मिठाइयां बांटी गई, लेकिन अपनी ही पार्टी के सांसद की मौत पर किसी बड़े नेता ने यहां पहुंचकर शोक तक व्यक्त नहीं किया। भाजपा के दूसरे सांसद थे धर्मेंद्र
भाजपा पदाधिकारियों के अनुसार- बीकानेर लोकसभा में भाजपा का खाता महेंद्र सिंह भाटी ने 1996 में खोला था। इसके बाद धर्मेंद्र ने ही भाजपा को जीत दिलाई थी। इसके बाद से इस सीट से अर्जुनराम मेघवाल लगातार भाजपा के सांसद हैं। धर्मेंद्र की जीत के बाद यहां कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला। खास बात ये है कि धर्मेंद्र ने बीकानेर शहर की दोनों सीटों से ही बढ़त बनाई थी और वर्तमान में भी शहर से ही लोकसभा सीट में भाजपा को बढ़त मिलती है। इसके बावजूद पार्टी की ओर से उन्हें याद नहीं करना धर्मेंद्र के साथ काम कर चुके कई भाजपा नेताओं को अखर रहा है। धर्मेंद्र से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बीकानेर से सांसद रहे थे धर्मेंद्र:जिसके खिलाफ चुनाव लड़ा, उसे बताया था छोटा भाई; सूरसागर के लिए किया था काम दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन हो गया। 89 साल के एक्टर ने सोमवार को घर पर ही अंतिम सांस ली। धर्मेंद्र 14वीं लोकसभा में साल 2004 से 2009 तक बीकानेर से सांसद रहे थे। सांसद रहते हुए वे काफी विवादों में रहे थे। (पढ़ें पूरी खबर) धर्मेंद्र ने कम करवा दी थी राजस्थान यूनिवर्सिटी की फीस:चुनाव जीतने के बाद इतना क्रेज था कि समस्याएं सुनने जाते, लोग फोटो और ऑटोग्राफ में बिजी कर देते दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र का निधन हो गया है। राजस्थान से भी उनकी यादों के कई किस्से जुड़ें हैं। उन्होंने राजस्थान के बीकानेर से चुनाव लड़ा था। उनका क्रेज इतना था कि वे लोगों की समस्याएं दूर करने निकलते थे, लेकिन लोग फोटो खिंचवाने और ऑटोग्राफ लेने में बिजी कर देते थे। राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कॉलेज फीस बढ़ा दी थी तो धर्मेंद्र ने राज्यपाल से बात कर कम करवा दी थी। (पढ़ें पूरी खबर) टोंक में धर्मेंद्र को देखने उमड़े थे लोग:बनास नदी के रेतीले धोरों पर फिल्माया गया था ‘रजिया सुल्तान’ का गाना साल 1981 में टोंक की बनास नदी के फ्रेजर पुल के पास रेतीले टीलों के बीच धर्मेंद्र और हेमामालिनी पर फिल्म ‘रजिया सुल्तान’ का गाना ‘ऐ दिल-ए-नादान’ फिल्माया गया था। तब धर्मेंद्र को देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। (पढ़ें पूरी खबर)


