धार प्रधान डाकघर में 35 लाख रुपए से अधिक के वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। नौगांव पुलिस ने मंगलवार को पोस्ट मास्टर सहित तीन कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। इन पर शासकीय और डाक बचत योजनाओं की राशि में 35 लाख 68 हजार 904 रुपए का गबन करने का आरोप है। प्रकरण दर्ज होने के बाद से तीनों आरोपी फरार हैं। यह कार्रवाई डाक विभाग, इंदौर नगरेतर संभाग के अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत आवेदन और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने मार्च से दिसंबर 2025 के बीच सुनियोजित तरीके से वित्तीय अनियमितताएं कीं। वर्ष 2025 में एनएससी (राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र) के सत्यापन के दौरान यह घोटाला सामने आया। आरोपियों ने गलत तरह से भुगतान प्राप्त किया
जांच में पता चला कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत जारी किए गए एनएससी प्रमाण पत्रों का भुगतान वर्ष 2019 में ही हो चुका था। इसके बावजूद, आरोपियों ने फिनेकल सॉफ्टवेयर में इन प्रमाण पत्रों को सक्रिय दिखाकर दोबारा नकद भुगतान प्राप्त कर लिया। पुलिस के अनुसार, इस घोटाले में निलंबित डिप्टी पोस्ट मास्टर निर्मलसिंह पंवार, निलंबित पोस्ट मास्टर कुणाल मकवाना और निलंबित डाक सहायक मेपालसिंह गुंडिया की मुख्य भूमिका है। इन तीनों ने अपनी फिनेकल आईडी का दुरुपयोग कर प्रमाण पत्रों को ‘अनफ्रिज’ किया। जांच में यह भी सामने आया कि निसरपुर उपडाकघर से वर्ष 2013 में जारी कुछ प्रमाण पत्रों को अनाधिकृत रूप से स्थानांतरित कर दोबारा भुगतान कराया गया, जिससे 3.57 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में बिना मूल रिकॉर्ड के भुगतान दिखाकर 2.51 लाख रुपए का गबन किया गया। एक अन्य मामले में, खाताधारक गोकुलसिंह नरगेश द्वारा सावधि जमा के लिए दिए गए 6.60 लाख रुपए के चेक को बिना खाता खोले ही नकद निकाल लिया गया। नौगांव पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।


