धार कलेक्ट्रेट परिसर में अतिथि शिक्षकों का तीन दिवसीय धरना आज (रविवार) समाप्त हो गया। इस दौरान आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ, मध्य प्रदेश के नेतृत्व में जिलेभर के अतिथि शिक्षकों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में संविदा शिक्षक बनाने, सेवाकाल 62 वर्ष तक बढ़ाने और कार्य अनुभव व वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की प्रमुख मांगें रखी गईं। अतिथि शिक्षकों ने बताया कि वे वर्षों से शासकीय स्कूलों में पूरी निष्ठा के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई स्थायी और स्पष्ट नीति लागू नहीं की गई है, जिससे उनके मन में अनिश्चितता बनी हुई है। इसी अनिश्चितता और उपेक्षा के विरोध में जिलेभर के अतिथि शिक्षक तीन दिनों से कलेक्ट्रेट परिसर में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक मौजूद रहे। सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर सरकार से अपनी वर्षों पुरानी मांगों पर विचार करने की अपील की। संविदा शिक्षक बनाने की मांग की
नायब तहसीलदार ने अतिथि शिक्षकों से ज्ञापन प्राप्त किया और इसे वरिष्ठ अधिकारियों तथा शासन स्तर तक उचित माध्यम से पहुंचाने का आश्वासन दिया। अतिथि शिक्षक संघ की प्रतिनिधि प्रेमलता राठौर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा देते हुए करीब 15 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने हजारों बच्चों को शिक्षा दी है, जिनमें से कई आज अच्छी नौकरियों में कार्यरत हैं। राठौर ने आगे कहा, “हमारे पढ़ाए हुए बच्चे भी हमसे यही सवाल करते हैं कि आप अब तक सुरक्षित क्यों नहीं हुईं। इतने वर्षों की सेवा के बाद भी अगर हमारा भविष्य असुरक्षित है, तो यह चिंताजनक है।” उन्होंने सरकार से अतिथि शिक्षक से संविदा शिक्षक बनाने की मांग की, ताकि उनका भविष्य और परिवार दोनों सुरक्षित हो सकें। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि यदि शासन स्तर पर जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे। इसकी पूरी जवाबदारी शासन-प्रशासन की रहेगी।


