धार। मांडू लिंक रोड पर बन रहा नया विधि महाविद्यालय भवन दो साल बाद भी अधूरा पड़ा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां मूट कोर्ट का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे विधि विद्यार्थियों की व्यावहारिक शिक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। मूट कोर्ट को लॉ छात्रों की “प्रैक्टिकल लैब” माना जाता है, जहाँ वे जिरह, बहस, केस पेश करना और न्यायिक कार्यवाही जैसे जरूरी अभ्यास करते हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मूट कोर्ट के लिए शुरुआती बजट में राशि का प्रावधान नहीं था। अब शासन को नया प्रस्ताव भेजा गया है और बजट स्वीकृत होने पर ही मूट कोर्ट का निर्माण हो सकेगा। 80% निर्माण पूरा, पर कई जरूरी काम अधूरे करीब 80 प्रतिशत भवन निर्माण पूरा हो चुका है। निर्माण एजेंसी जल्द ही भवन हस्तांतरित करने की तैयारी में है, लेकिन परिसर में बाउंड्री वॉल, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य मूलभूत कार्य अभी भी बाकी हैं। इन कमियों के कारण रात में परिसर में अनाधिकृत प्रवेश का खतरा बना रहता है। परियोजना के लिए 9 करोड़ 36 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन यह राशि दूसरी मंजिल तक आते-आते खत्म हो गई। इसके बाद पीआईयू ने शासन से 4 करोड़ 88 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट मांगा है। पहले जीपीजी कॉलेज के अंतर्गत लॉ कॉलेज चलता था, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के कारण पृथक भवन अनिवार्य होने से यह व्यवस्था डेढ़ दशक पहले बंद हो गई थी। विधायक नीना वर्मा की पहल पर नया विधि महाविद्यालय स्वीकृत किया गया। लॉ कॉलेज को 28 जुलाई 2023 को स्वीकृति मिली थी और इसे 18 महीनों में पूरा होना था, लेकिन बजट की कमी से काम बार-बार रुकता रहा। वर्तमान में सफाई और छोटे-मोटे समापन कार्य जारी हैं, मगर कई अहम काम अधूरे पड़े हैं। छात्र परेशान हो रहे, निजी कॉलेजों में जाना पड़ रहा स्थानीय छात्रों का कहना है कि भवन समय पर पूरा न होने और कॉलेज शुरू न होने के कारण उन्हें भटकना पड़ रहा है। कई छात्रों को मजबूर होकर निजी कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ रहा है, जहां फीस भी ज्यादा है।


