धोरों में बागवानी: रिटायर्ड अफसर की जिद से लहलहा रहे अंजीर, अनार के पौधे, सालाना कमाई लाखों रुपए

भास्कर न्यूज| जैसलमेर रेगिस्तान की तपती रेत और पानी की किल्लत के बीच अगर कोई कहे कि वहां सेब के आकार के बेर, रसीले अनार और अंजीर की खेती हो रही है, तो शायद यकीन करना मुश्किल हो। लेकिन सरहदी जिले के बांधा नहरी क्षेत्र में पूर्व वन अधिकारी बीएल यादव ने यह काम संभव कर िदखाया। मेहनत और विजन से उन्होंने रेतीले टीलों के बीच एक ऐसा बगीचा तैयार किया है जो आज प्रदेश के किसानों के लिए मॉडल बन गया है। करीब तीन साल पहले वन विभाग से सेवानिवृत होने के बाद बीएल यादव ने खेती में कुछ नया करने की ठानी। पारंपरिक फसलों के बजाय उन्होंने बागवानी को चुना। आज उनके एक मुरब्बे के बगीचे से सालाना लाखों की आय हो रही है। इस बगीचे की खास बात यह है कि यहां ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल किया गया है। यादव के बगीचे में केवल फल ही नहीं, बल्कि फूलों की खेती भी बड़े स्तर पर हो रही है। 10 बीघा क्षेत्र में गेंदे के फूल लहलहा रहे हैं, जिससे करीब 2 लाख रुपए की आय की उम्मीद है। रेगिस्तान में अंजीर का प्रयोग सफल रहा है। यहां 400 पौधे अंजीर के लगे हैं। जिसमें फ्रूटिंग शुरू हो चुकी है। खट्टे फलों के लिए मशहूर इस बेल्ट में 3300 नींबू और 2500 मौसम्बी के पौधे फल दे रहे हैं। बगीचे में 2 हजार अनार और 1 हजार किन्नू के पौधे हरियाली बिखेर रहे हैं। थार की गर्मी को मात देते हुए 2 हजार एपल बैर के पौधे भी लगाए गए हैं। जैसलमेर जैसे विषम परिस्थितियों वाले जिले में इस तरह की खेती करना किसी चुनौती से कम नहीं था। रेतीली आंधियां और 48 डिग्री का तापमान पौधों को सुखा सकता था, लेकिन समय पर खाद-पानी और पौधों की देखरेख ने इसे सफल बनाया। अंजीर : एक पौधे से औसतन 10 से 15 किलो पैदावार। एपल बैर : प्रति पौधा 25 से 30 किलो का उत्पादन। अनार : एक पौधे से 25 से 30 किलो अनार मिल रहे हैं। गेंंदा : एक बीघा में 5 से 7 क्विंटल जैसलमेर में फिलहाल यह नींबू, अनार, आंवला व खजूर पर लागू होती है। इसके अलावा ड्रिप सिस्टम पर भी सब्सिडी है। अनार में वर्तमान में 1.60 लाख की सब्सिडी है। प्रति किसान 2 हैक्टेयर तक की सब्सिडी है। इसके लिए किसान साथी में आवेदन करना पड़ता है। जिसके तहत ऑर्डर तैयार हो जाता है। उसके बाद किसान को टिश्यू कल्चर कंपनियों से पौधे लाकर खेत में लगाने होत है और 15 से 20 दिन के प्लांटेशन के बाद अधिकारी मौका मुआयना करके सब्सिडी की राशि आपके खाते में जमा करवा देते हैं। प्रति पौधा उत्पादन और मुनाफे का गणित

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