जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, धौलपुर और प्रयत्न संस्था धौलपुर द्वारा संचालित परियोजना कवच के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एक दिवसीय सीएमपीओज कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला एडीआर परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मीटिंग हॉल में हुई। इसका आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान और अध्यक्ष संजीव मागो के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रेखा यादव और अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हवा सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण कर किया। कार्यशाला में सचिव रेखा यादव ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली ने नालसा आशा (जागरूकता, समर्थन, सहायता और कार्यवाही) मानक संचालन प्रक्रिया – बाल विवाह मुक्ति की ओर अग्रसर 2025 लागू की है। इस योजना का उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा की रोकथाम, पीड़ित बच्चों को त्वरित कानूनी संरक्षण व सहायता प्रदान करना और जन-जागरूकता को सशक्त बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। रेखा यादव ने निःशुल्क कानूनी सहायता, नालसा हेल्पलाइन 15100, न्याय आपके द्वार अभियान, मीडिएशन फॉर दी नेशन 2.0, राष्ट्रीय लोक अदालत, पीड़ित प्रतिकर योजना और महिलाओं के विरुद्ध जेंडर आधारित हिंसा रोकने हेतु नई चेतना 4.0 अभियान की भी जानकारी दी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हवा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन है। इसके उन्मूलन के लिए समाज, सरकार और प्रत्येक नागरिक को सामूहिक प्रयास करने होंगे। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष मधु शर्मा ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका और 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कानूनन अपराध है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास को प्रभावित करता है। बाल कल्याण समिति के सदस्य माजिद सरीफी और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल मीता अग्रवाल ने बाल विवाह के दुष्परिणामों व कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला। परियोजना अधिकारी रजनी जैन ने परियोजना कवच की कार्यनीति व उद्देश्यों की जानकारी प्रस्तुत की।


