नई पॉलिसी से रियल एस्टेट कारोबार पर ब्रेक, गलाडा में 25 नए प्रोजेक्ट अटके

भास्कर न्यूज |लुधियाना पंजाब सरकार की नई पॉलिसी ने रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल मचा दी है। कॉलोनाइजरों और डेवलपर्स के लिए नियमों को सख्त किए जाने के बाद लुधियाना में गलाडा दफ्तर में करीब 25 नए प्रोजेक्ट अटक गए हैं। ये वे प्रोजेक्ट हैं, जिनकी फाइलें पहले की पॉलिसी के तहत पूरी कर ली गई थीं और फीस भी जमा करवाई जा चुकी थी, लेकिन अब नई अधिसूचना लागू होने के बाद उन्हें दोबारा नियमों के दायरे में लाया जा रहा है। पंजाब सरकार ने पंजाब अपार्टमेंट एवं संपत्ति विनियमन अधिनियम, 1995 के तहत कॉलोनियों के विकास से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। दिसम्बर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार अब कोई भी प्रमोटर या डेवलपर बिना तय शर्तें पूरी किए कॉलोनी विकसित नहीं कर सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर कॉलोनी के लिए अलग लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। आवेदन के समय प्रमोटर को प्रोजेक्ट की जमीन पर 100% मालिकाना हक, भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति, निर्धारित जानकारी और फीस जमा करनी होगी। बिना लाइसेंस कॉलोनी काटना पूरी तरह अवैध माना जाएगा। कॉलोनाइजर एंड प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन के प्रधान गुरविंदर सिंह लांबा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार रियल एस्टेट कारोबार को कमजोर कर रही है और इसका फायदा दिल्ली और मुंबई की बड़ी कंपनियों को मिल रहा है। लांबा का कहना है कि जिन डेवलपर्स ने पहले ही पुरानी पॉलिसी के तहत फाइलें और फीस जमा करवा दी थीं, उन्हें कम से कम राहत दी जानी चाहिए। नई पॉलिसी केवल नए प्रोजेक्ट्स पर लागू होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में आम जनता की सहूलियत के लिए डेवलपर्स से कम फीस ली जाती है, ताकि वे बजट के अनुसार मकान बना सकें, लेकिन पंजाब में नीतियों के कारण घर आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। यदि सरकार ने समय रहते नीति में संतुलन नहीं बनाया, तो रियल एस्टेट का कारोबार पूरी तरह बाहरी कंपनियों के हाथों में चला जाएगा। रियल एस्टेट कारोबारी लक्की सोबती ने कहा कि सरकार को इस फैसले को लेने से पहले रियल एस्टेट कारोबारियों के साथ मीटिंग करनी चाहिए थी। जिन्होंने पहले ही प्रोजेक्ट पास कराए थे वे भी रुक गए हैं। सरकार पुरानी फाइलों को पास करने के बाद नए प्रोजेक्टों में ये नियम लागू करे। नई पॉलिसी के तहत एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। प्रमोटर को कुल एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज का 25% हिस्सा पहले जमा करना होगा। शेष 75% राशि या तो एकमुश्त जमा करनी होगी, जिस पर 5% की छूट दी जाएगी या फिर 6 छमाही किस्तों में 12% ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। किस्तों के विकल्प में प्रमोटर को बैंक गारंटी या संपत्ति को गिरवी (मॉर्गेज) रखना अनिवार्य होगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि भुगतान में चूक होने पर संबंधित प्राधिकरण गिरवी रखी संपत्ति को नीलाम कर बकाया वसूली कर सकेगा। इंटरनल डेवलपमेंट वर्क्स के लिए भी नई शर्तें लागू की गई हैं। प्रमोटर को आंतरिक विकास कार्यों की अनुमानित लागत का 35% बैंक गारंटी या मॉर्गेज के रूप में देना होगा। आवासीय परियोजनाओं के लिए लागत 80 लाख रुपए प्रति एकड़ और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए 100 लाख रुपए प्रति एकड़ तय की गई है, जिसमें हर साल 5% की बढ़ोतरी होगी।

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