नई वार्डबंदी पसंद नहीं आई, 46.95% मतदान, पिछली बार से 11.13% कम

भास्कर न्यूज|लुधियाना नगर निगम चुनाव में मतदान प्रतिशत 2018 के मुकाबले 11.13 फीसदी कम रहा। वोट फीसदी कम होने के कारण कई प्रत्याशियों की जीत-हार का गणित बिगड़ गया। नई वार्डबंदी में खामियां, चुनाव में देरी, पब्लिक की समस्याओं का समय से निस्तारण ना होना, राजनीतिक दलों की तकरारों के साथ-साथ ठंड भी वोट परसेंट कम होने का कारण रहे। 2018 में नगर निगम चुनाव में मतदान का प्रतिशत 58.08 था। 2024 में नगर निगम के चुनाव देरी से हुए हैं। इस बार चुनाव आयोग ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य तय किया था। सुबह सात बजे से मतदान शुरू किया गया था लेकिन मतदाता ठंड के कारण कम संख्या में सुबह मतदान केंद्रों तक पहुंचे। सुबह 7 बजे से 9 बजे तक महज 5.7 फीसदी मतदान हुआ। 10 बजे के बाद मतदाता घरों से निकले जिसके बाद दोपहर में मतदान का प्रतिशत बढ़ा। 9 बजे से 11 बजे तक मतदान का प्रतिशत 15.99 फीसदी रहा। 11 बजे से 1 बजे तक मतदान का फीसद बढ़कर 29.87 फीसदी दर्ज किया गया। 1 बजे से शाम चार बजे के बाद तक मतदान का प्रतिशत 46.95 रहा। वोट परसेंट कम होने से राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की जीत पर भी असर पड़ा। नगर निगम लुधियाना के साथ-साथ एमसी माछीवाड़ा, नगर पालिका मलौध, एमसी मुल्लांपुर दाखा, एमसी साहनेवाल, एमसी खन्ना, एमसी समराला के भी चुनाव संपन्न हुए। खास बात यह है कि इस बार शहरी इलाके में जहां मतदान कम हुआ, वहीं ग्रामीण इलाकों में मतदान का प्रतिशत अधिक रहा है। सर्वाधिक मतदान प्रतिशत नगर पालिका इस बार का 79.46 फीसदी रहा जबकि दूसरे नंबर पर एमसी माछीवाड़ा-69.01 के अंतर्गत मतदान अधिक हुआ। तीसरे नंबर पर एमसी समराला में 65.25 फीसदी मतदान हुआ। नगर निकाय -मतदान का प्रतिशत एमसी माछीवाड़ा-69.01 फीसदी नगर पालिका मलोद-79.46 फीसदी एमसी मुल्लांपुर दाखा-60.13 फीसदी एमसी साहनेवाल-61.41 फीसदी एमसी खन्ना-53.71 फीसदी एमसी समराला- 65.25 फीसदी नगर निगम चुनाव में आत्म नगर हलके में बैंस ग्रुप को करारी हार का सामना करना पड़ा। आत्मनगर में बैंस ग्रुप के 9 में से 3 उम्मीदवार ही जीते। इस हलके में कांग्रेस वर्करों को दरकिनार करने और बैंस ग्रुप के समर्थकों को टिकट देने के आरोप लगे थे। हलका इंचार्ज ईश्वरजोत चीमा ने सोशल मीडिया में इसे लेकर विरोध किया था। कांग्रेस के पूर्व मंत्री भारत आशु और ईश्वर जोत चीमा की होर्डिंग्स से फोटो भी हटा दी गई थी। कांग्रेस में गुटबाजी भी साफ तौर पर दिखी थी। कांग्रेस के प्रधान राजा वड़िंग ने बैंस ब्रदर्स पर भरोसा करते हुए शराब के ठेकेदारों को मैदान में उतारा था लेकिन कांग्रेस को निराशा हाथ लगी है। वार्ड 49 से अनीता शर्मा को 161 वोट से विजय मिली, जबकि बैंस की उम्मीदवार रेशमा सूद को हार का सामना करना पड़ा। बैंस ग्रुप ने वार्ड नंबर 50 में पारीक शर्मा को टिकट दिया, लेकिन सिद्धू ग्रुप के विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के बेटे युवराज सिंह सिद्धू ने स्थानीय निवासियों के समर्थन से जीत हासिल की। वार्ड 48 में बैंस के उम्मीदवार सुखविंदर सिंह की हार हुई। वार्ड नंबर 51 से उम्मीदवार कमलप्रीत कौर को हार का सामना करना पड़ा, जबकि आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार कोमल प्रीत कौर ने 296 वोटों से जीत हासिल की। वार्ड नंबर 77 में बैंस ग्रुप की प्रभजोत कौर खुराना हार गईं। जानकारों की मानें तो कांग्रेस के नेता भारत भूषण आशु और डाबर ग्रुप ने बैंस के उम्मीदवारों से दूरी बनाई, जिसके कारण बैंस ग्रुप को भारी नुकसान हुआ। सुनीता भण्डारी (78 साल) पलक (19 साल) गुरचरन सिंह (72 साल) अमरजीत कौर (75 साल) रतनलाल (83 साल) शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाके मतदान में आगे रहे उम्र 35 साल-मनजीत सिंह उम्र 70 साल-मनजीत सिंह उम्र 70 साल-प्रीतम सिंह कांग्रेस को गुटबाजी से नुकसान, बैंस ग्रुप को लगा झटका, आत्मनगर में 9 में से 3 प्रत्याशी ही जीते मत का इस्तेमाल

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