भास्कर न्यूज | तमता साल 2025 की विदाई और नववर्ष के जोरदार स्वागत को लेकर जशपुर जिले के पर्यटन स्थलों में अभी से रौनक बढ़ने लगी है। खासकर पत्थलगांव विकासखंड के प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट इन दिनों सैलानियों से गुलजार हैं। दिसंबर के अंतिम सप्ताह से ही यहां पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। जिले का शांत वातावरण, हरियाली से घिरी पहाड़ी श्रृंखलाएं और नीले पानी से भरे डैम स्थानीय लोगों के साथ-साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। नववर्ष के अवसर पर जिले के कई प्रमुख पर्यटन स्थल सैलानियों की पहली पसंद बने हुए हैं। तमता घोघरा डैम इन दिनों खासा चर्चा में है। यहां जिला प्रशासन द्वारा पहाड़ी की चोटी पर गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया है, जिससे पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिलने लगी है। प्रशासन की योजना आने वाले समय में यहां स्पीड बोटिंग जैसी रोमांचक गतिविधि शुरू करने की भी है, जिससे यह स्थल और अधिक आकर्षक बन सके। पत्थलगांव से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित केसला पाठ पहाड़ भी पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। यह स्थान अपनी रमणीक वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। खास बात यह है कि यहां ऐतिहासिक केसला पाठ मेला 4 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। मेले को लेकर समिति द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेले के वनभोज और पिकनिक के लिए प्रमुख केंद्र इसके अलावा बालाझर डैम, घर्जियाबथान डैम, खरकट्टा डैम और किलकिला स्थित मांड नदी का तट भी वनभोज और पिकनिक के लिए प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। इन स्थानों पर स्कूलों के छात्र, युवक-युवतियां और सपरिवार आने वाले लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। लोग प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताकर नए साल का जश्न मनाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, सैलानियों की बढ़ती संख्या के बीच स्थानीय लोगों में सुविधाओं के अभाव को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इन खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों को अब तक सरकारी स्तर पर पूरी तरह विकसित नहीं किया गया है। कई स्थानों पर बैठने, शौचालय, पेयजल और ठहरने जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि शासन इन स्थानों को संरक्षित पर्यटन क्षेत्र घोषित कर विकास कार्य कराए, तो इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।


