नए CBI डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए PMO में बैठक:राहुल गांधी, CJI संजीव खन्ना भी शामिल हुए; मौजूदा डायरेक्टर 25 मई को रिटायर होंगे

PM मोदी ने सोमवार को नए CBI डायरेक्टर के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में मीटिंग की। इस मीटिंग में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना भी शामिल हुए। मौजूदा सीबीआई डायरेक्टर प्रवीण सूद 25 मई को रिटायर होंगे। सूद कर्नाटक कैडर के 1986 बैच के IPS अधिकारी हैं। उन्होंने 25 मई, 2023 को सीबीआई चीफ का पद संभाला था। CBI डायरेक्टर का कार्यकाल सिर्फ दो साल का होता है। मौजूदा डायरेक्टर प्रवीण सूद हिमाचल के हैं, 22 साल की उम्र में IPS बने प्रवीण सूद हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के रहने वाले हैं। उनके पिता ओम प्रकाश सूद दिल्ली सरकार में क्लर्क थे, जबकि मां कमलेश सूद दिल्ली के सरकारी स्कूल की टीचर थीं। सूद की स्कूलिंग दिल्ली के सरकारी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने IIT दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ‌B Tech किया। 1986 में वे 22 साल की उम्र में IPS बने। उन्हें कर्नाटक कैडर मिला। सर्विस के दौरान ही उन्होंने IIM बेंगलुरु से पब्लिक पुलिस मैनेजमेंट में MBA पूरा किया। पुलिस सर्विस के शुरुआती दौर में वे बेल्लारी और रायचुर में SP रहे। इसके अलावा बेंगलुरु और मैसूरु में वे DCP भी रहे। सूद को 1996 में CM की ओर से गोल्ड मेडल मिल चुका है। इसके अलावा 2002 में पुलिस पदक और 2011 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति की तरफ से पुलिस पदक दिया गया था। जून 2020 में प्रवीण सूद कर्नाटक के DGP बनाए गए थे। CBI डायरेक्टर का सिलेक्शन प्रोसेस
CBI डायरेक्टर के सिलेक्शन के लिए प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा में विपक्ष के नेता की मीटिंग में नाम फाइनल होता है। इसके बाद गृह मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DOPT) आदेश जारी करता है। दो साल का ही कार्यकाल क्यों होता है
2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जिन सीनियर अधिकारियों के रिटायरमेंट को छह महीने से कम बचे हैं। ऐसे किसी भी अधिकारी को CBI डायरेक्टर के पद के लिए विचार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि डायरेक्टर का कार्यकाल 2 साल से कम नहीं हो सकता है और नियुक्ति समिति की सहमति से ही उनका तबादला किया जा सकता है। सेंट्रल विजिलेंस कमीशन एक्ट 2003 ने CBI डायरेक्टर का कार्यकाल 2 साल निर्धारित किया था। ————————- ये खबर भी पढ़ें… राहुल की नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रिपोर्ट के अभाव में केस किया बंद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताने वाले केस को बंद कर दिया है। कोर्ट ने कहा- राहुल की नागरिकता की रिपोर्ट केंद्र सरकार पेश नहीं कर पाई। कोर्ट ने कहा- केवल रिपोर्ट के इंतजार में याचिका को लंबित नहीं रखा जा सकता। पढ़ें पूरी खबर…

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