पिलानी पुलिस ने मण्णपुरम फाइनेंस लिमिटेड की स्थानीय शाखा में हुए एक बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ किया है। कंपनी के ही भरोसेमंद अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए नकली सोने को असली बताकर लाखों रुपये का चूना लगा दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शाखा प्रबंधक (Branch Manager) और सहायक शाखा प्रबंधक (Assistant Branch Manager) को गिरफ्तार कर लिया है।
पिलानी थानाधिकारी चंद्रभान के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों को खंगाला। इसके बाद सहायक शाखा प्रबंधक नरेन्द्र सिंह (25) पुत्र बजरंग सिंह, निवासी ढाणी देवलक्या (गुढ़ागौड़जी, झुंझुनूं) और शाखा प्रबंधक संदीप सैनी (27): पुत्र गणेशराम सैनी, निवासी श्रीमाधोपुर (सीकर) को गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे हुआ ‘प्योर गोल्ड’ के नाम पर बड़ा खेल पुलिस जांच और कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रांच मैनेजर संदीप सैनी और सहायक मैनेजर नरेन्द्र सिंह ने मिलकर गबन की इस साजिश को अंजाम दिया। इन्होंने अपने पद का फायदा उठाते हुए ‘अंडर स्टोन’ (पत्थर लगे गहने) और पूरी तरह से नकली आभूषणों को रिकॉर्ड में असली सोना दर्शाया। आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर करीब 30,08,281 रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया और राशि हड़प ली। ऑडिट में खुली पोल, 10 बैंक खातों ने उगला राज
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 12 अक्टूबर से 24 अक्टूबर 2025 के बीच कंपनी के ऑडिटर हेमराज मीणा और मनीष कुमार ने शाखा का निरीक्षण किया। ऑडिट में पाया गया कि कई पैकेटों में सोना गायब है या फिर उसकी शुद्धता शून्य है। इसके बाद एरिया मैनेजर लोकेश शर्मा ने 9 दिसंबर 2025 को पिलानी थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने ऐसे कसा शिकंजा पिलानी थानाधिकारी चंद्रभान के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों को खंगाला। पुलिस ने बैंक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिससे संदिग्ध लेनदेन और आरोपियों की मिलीभगत के सबूत मिले। जांच में करीब 10 ऐसे बैंक खाते सामने आए, जिनमें लोन की यह राशि ट्रांसफर की गई थी। ये खाते आरोपियों के करीबियों के थे।
एएसआई कमल सिंह ने शाखा के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की, जिसमें नकली गहनों पर लोन अप्रूव करने के पुख्ता प्रमाण मिले।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को तीन दिन के रिमांड पर लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गबन में और कौन-कौन शामिल है और गबन की गई राशि का कहां निवेश किया गया है।


