राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने बाड़मेर पुलिस की ओर से हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ दर्ज FIR पर कार्रवाई को स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में बाड़मेर SP और कोतवाल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश जारी किए हैं। यह FIR मार्च माह में बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक के सरकारी वाहन पर कथित टक्कर के मामले में दर्ज की गई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि शैलेन्द्र सिंह ने अपने वाहन से जानलेवा हमला किया। इसको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हालांकि, न्यायमूर्ति फरजंद अली ने वीडियो फुटेज और तस्वीरों की जांच के बाद पाया कि वाहनों के बीच कोई टक्कर नहीं हुई थी और यह मामला झूठे सबूत गढ़ने का प्रतीत होता है। कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं 182, 193, और 211 के तहत अपराध की संभावना को लेकर पुलिस अधीक्षक और कोतवाली थाना प्रभारी को शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री धीरेंद्र सिंह और उनकी सहायक अधिवक्ता सुश्री प्रियंका बोराना ने तर्क प्रस्तुत किए। न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए। अगली सुनवाई 28 जनवरी 2025 को होगी, जिसमें अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। यह था पूरा मामला दरअसल बाड़मेर के कोतवाली थाने में कांस्टेबल पृथ्वी सिंह राजपुरोहित ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी बताया कि वह बाड़मेर के सरकारी वाहन स्कॉर्पियो के चालक हैं। 28 मार्च को सुबह 12 बजे के लगभग सरकारी हॉस्पिटल बाड़मेर के आगे किडनैप की घटना घटित होने पर बाड़मेर ACP के साथ सरकारी वाहन से रवाना हुए। किडनैप करने वाले आरोपियों की तलाश करते हुए चौहटन चौराहे की तरफ जा रहे थे। इतने में महाबार सर्किल पर एक काले रंग की स्कॉर्पियो बिना नंबरी सामने से आई। जिसे रुकवाने का इशारा करने पर स्कॉर्पियो के चालक शैलेंद्र सिंह राजपूत निवासी ने हमारी सरकारी गाड़ी को जान से मारने की नीयत से गाड़ी को टक्कर मार कर गाड़ी को भगा ले गया। इसके चलते गाड़ी के आगे का शीशा खाली साइड वाला बंपर और फाटक क्षतिग्रस्त हो गया। इस वाहन का पीछा QRT टीम की ओर से किया गया तो वाहन को महाबार चौराहा, चौहटन चौराहे होते हुए सरकारी वाहन को देखकर आरोपी वाहन को धांधूपूरा के पास छोड़कर मौके से फरार हो गया। वहां खड़े लोगों से पता किया तो पता चला कि वाहन में दो व्यक्ति थे जो पैदल खेतों की तरफ भाग गए। तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो से गाड़ी के कागजात और पहचान के डॉक्यूमेंट मिले। इस मामले के दर्ज होने के बाद इसे कोर्ट में चैलेंज किया गया था। जिस पर कोर्ट ने सबूतों, वीडियो फुटेज आदि देखने के बाद ये आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे झूठा बताया है।


