नगर निगम बोर्ड:पुनर्गठन के बाद निगम में 80 वार्डों के लिए होंगे चुनाव, भाजपा लगातार 7वीं जीत तो कांग्रेस इस क्रम को तोड़ने की तैयारी में

नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो चुका है। प्रदेश सरकार उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, कोटा सहित अन्य नगर निकायों के परिसीमन और पुनर्गठन के काम में जुटी है। इस बीच, भाजपा-कांग्रेस सहित अन्य प्रमुख दल चुनाव की रणनीति बना रहे हैं। भाजपा लगातार 7वीं बार बोर्ड बनाने तो कांग्रेस उसका रथ थामने और खुद सत्ता पर काबिज होने की जुगत में है। दूसरी ओर नगर निगम के पुनर्गठन के बाद मौजूदा 70 की जगह 80 वार्डों के लिए चुनाव होंगे। वर्ष 1994 से पहले तक नगर निगम (तत्कालीन नगर परिषद) कांग्रेस का गढ़ था। कांग्रेस ने लगातार 7 जीत दर्ज की थी। 1994 से भाजपा ने सेंध लगाई और तभी से लगातार छह बार काबिज है। अब वह लगातार 7वीं बार जीत दर्ज कर कांग्रेस केे रिकॉर्ड की बराबरी करना चाहेगी। कांग्रेस भी एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस उदयपुर शहर विधानसभा सीट पर पिछले 5 चुनाव लगातार और 1990 से अभी तक 8 में से 7 चुनाव हार चुकी है। इसके अलावा उदयपुर में लोकसभा के 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन चुनावों में लगातार हार चुकी है। बता दें कि 19 नवंबर 2019 को कांग्रेस के 20, भाजपा के 44 और 6 अन्य पार्षद जीते थे। भाजपा का गढ़ भेदने में कांग्रेस के सामने ये चुनौतियां
उदयपुर में कांग्रेस पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी और पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा गुट में बंटी है। एक गुट से जुड़े नेता दूसरे गुट के नेताओं को हराने के लिए अंदरखाने जुटे रहते हैं। हालांकि, तीनों ही शीर्ष नेता कांग्रेस में गुटबाजी की बात को खारिज करते आ रहे हैं। आपसी कलह में डूबी कांग्रेस 5 साल में निगम में नेता प्रतिपक्ष तक नहीं बना सकी। भाजपा के सामने 7वीं बार जीत दर्ज करने में ये चुनौती पिछले एक साल से शहर भाजपा में कलह चल रही है। तत्कालीन डिप्टी मेयर पारस सिंघवी व उनके ही साथी पार्षदों के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिल चुकी है। विधानसभा चुनाव-2023 में सिंघवी की दावेदारी के बीच ताराचंद जैन को टिकट देने के बाद भी विरोध हुआ था, लेकिन जैन चुनाव जीत गए। हाल ही सिंघवी व जैन के बीच एलिवेटेड रोड पर भी सियासी घमासान चला था। नगर निगम में नए वार्ड बनने का किस दल को फायदा?
अभी नगर निगम में 70 वार्ड हैं। इन्हें बढ़ाकर 80 किया जा रहा है। इसमें यूडीए पैराफेरी के 33 गांव जोड़कर 10 नए वार्ड बनेंगे। पुराने वार्डों की सीमाओं में भी बदलाव होगा। बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे नए सियासी समीकरण बनेंगे? इनसे भाजपा का गणित मजबूत होगा या कांग्रेस को खोई हुई सत्ता की चाबी वापस मिलेगी? इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। निगम के विस्तार में हवाला, हवाला खुर्द, बेदला, बेदला खुर्द, भुवाणा, रूप नगर, सापेटिया, सुखेर, शोभागपुरा, रेबारियों का गुड़ा, सीसारमा, बलीचा, धोल की पाटी, सवीना, सवीना खेड़ा, नेला, जोगी तालाब, देवाली, बीलिया, फांदा, तीतरड़ी, गुखर मगरी, देबारी, झरनों की सराय, धोली मगरी, बेड़वास, रकमपुरा, कलड़वास, मनवा खेड़ा, कानपुर, आयड़ ग्रामीण, देवाली को जोड़ा जाएगा। इन क्षेत्रों में भाजपा-कांग्रेस के प्रति जनता का झुकाव चुनावी रणनीति और नए विकास के वादों पर निर्भर करेगा। भास्कर रिकॉल – साल 2009 में परिषद से निगम बना : नगर निगम के वार्डों का साल 2009 और 2019 में विस्तार हुआ था। साल 2009 तक यहां नगर परिषद थी और 50 वार्ड थे। इन्हें 5 बढ़ाकर 55 किया गया। फिर साल 2013 में नगर निगम बना। चुनाव 2014 में हुए। इसके बाद 2019 में सीमा क्षेत्र का विस्तार करते हुए 15 वार्ड बढ़ाए गए। कुल वार्डों की संख्या बढ़कर 70 हो गई। इन वार्डों में 4.50 लाख की आबादी निवास करती है। नए वार्ड जुड़ने के बाद यह संख्या 5.50 लाख हो जाएगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *