नदी में सुसाइड करने उतरा युवक:सिविल डिफेंस की टीम ने पहुंचकर किया रेस्क्यू, बाद में निकला मॉक ड्रिल

शहर के बीचों-बीच बहने वाली नदी में एक युवक के डूबने की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस की टीम तुरंत हरकत में आ गई। सूचना में बताया गया कि नदी के बीच युवक फंसा हुआ है और उसकी जान को खतरा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सिविल डिफेंस की टीम बिना समय गंवाए मौके के लिए रवाना हुई। नदी किनारे मौजूद लोगों को कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो कोई वास्तविक घटना हो रही हो, लेकिन बाद में यह पता चला कि यह कोई सच्ची घटना नहीं बल्कि सिविल डिफेंस की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल थी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम जैसे ही जिला प्रशासन को इस बारे में सूचना मिली, तुरंत सिविल डिफेंस को अलर्ट किया गया। सूचना कलेक्टर और एडीएम स्तर तक पहुंचते ही रेस्क्यू टीम को निर्देश दिए गए। सिविल डिफेंस की टीम बिना किसी देरी के जरूरी इक्विपमेंट्स के साथ घटनास्थल पर पहुंची। नदी में युवक को डूबता देख टीम के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए पानी में छलांग लगाई। पूरे ऑपरेशन के दौरान टीम ने आपसी तालमेल और अनुशासन का परिचय दिया, जिससे रेस्क्यू काम तेजी से आगे बढ़ सका। नदी से सुरक्षित निकाला गया युवक रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक युवक तक पहुंचकर उसे सहारा दिया और नदी से बाहर निकाला। बाहर निकालने के बाद टीम ने प्राथमिक सहायता की प्रक्रिया अपनाई। युवक के पेट में भरे पानी को बाहर निकालने की कोशिश की गई, ताकि उसकी हालत स्थिर हो सके। इस दौरान मौके पर एंबुलेंस भी पहुंच चुकी थी। प्राथमिक उपचार के बाद युवक को एंबुलेंस के जरिए हॉस्पिटल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। पूरे घटनाक्रम को देखकर मौजूद लोग सिविल डिफेंस की कार्यकुशलता से प्रभावित नजर आए। मॉक ड्रिल के जरिए जांची गई आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था बाद में अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी घटना एक मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य आपात स्थिति में सिविल डिफेंस की प्रतिक्रिया, समय प्रबंधन और समन्वय क्षमता की जांच करना था। इस अभ्यास के जरिए यह देखा गया कि सूचना मिलने पर टीम कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती है, रेस्क्यू किस तरह किया जाता है और मेडिकल सहायता कितनी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाती है। मॉक ड्रिल के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पालन वास्तविक स्थिति की तरह किया गया। 12 सदस्यीय टीम ने दिखाई तत्परता और समन्वय सिविल डिफेंस टीम के सदस्य कैलाश वैष्णव और राजू भोई ने बताया कि सूचना मिलते ही उनकी टीम सक्रिय हो गई थी। उन्होंने बताया कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 12 सदस्यीय सिविल डिफेंस टीम शामिल थी, जिनके साथ 7 सहायक कर्मी भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन किया और मॉक ड्रिल को सफल बनाया। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की प्रैक्टिस भविष्य में किसी भी आपदा या आपात स्थिति से निपटने में काफी मददगार साबित होते हैं और टीम की तैयारियों को मजबूत बनाते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *