नरसिंहपुर रेलवे अस्पताल में गुरुवार को पश्चिम मध्य रेल की ओर से संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास की 269वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर रेल प्रशासन और अस्पताल स्टाफ ने सतनाम धर्म के प्रवर्तक को नमन किया। कार्यक्रम में सतनाम आंदोलन के जनक बाबा गुरु घासीदास के संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे ने बाबा गुरु घासीदास के छायाचित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर की। इस दौरान उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि बाबा घासीदास ने ‘मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश देकर समाज में समानता, भाईचारा और मानवता को मजबूत किया। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नारी सम्मान, अहिंसा, सत्य की उपासना, नशापान से दूरी और मांसाहार से परहेज जैसे मूल्यों का प्रचार किया। बाबा गुरु घासीदास का जन्म वर्ष 1756 में छत्तीसगढ़ के गिरोदपुरी धाम में हुआ था। उनकी जयंती पर गिरोदपुरी धाम में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां सत्य के प्रतीक ‘जय स्तंभ’ की स्थापना की गई है, जो ‘सत्य ही ईश्वर है’ का संदेश देता है। इस दिन पंथी नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनके जीवन, कार्यों और आदर्शों का प्रदर्शन किया जाता है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाबा गुरु घासीदास की शिक्षाओं को आज भी प्रासंगिक बताया। उनके संदेश सामाजिक समानता, शिक्षा, सत्य की जीत और सभी प्राणियों के प्रति करुणा का मार्ग दिखाते हैं। उपस्थित सभी लोगों ने उनके बताए रास्ते पर चलने और समाज में सद्भाव व समानता स्थापित करने का संकल्प लिया।


