नरेश बोले- बिरला, धारीवाल और भाया पूंजीपति वर्ग के नेता:सीमित वोटों के बावजूद राज कर रहे; राजनीति में बहरूपिया बनना पड़ता है

किसान नेता नरेश मीणा ने कहा- पूंजीपति वर्ग के नेता हाड़ौती में आदिवासी मीणा समाज की बड़ी संख्या होने के बावजूद उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखा गया है। मीणा के अनुसार, ओम बिरला, शांति धारीवाल, प्रमोद जैन भाया और प्रताप सिंह सिंघवी जैसे पूंजीपति वर्ग के नेता सीमित वोटों के बावजूद वर्षों से इस क्षेत्र पर शासन कर रहे हैं। मीणा ने कहा- आदिवासी समाज का भला सत्ता में भागीदारी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने हाड़ौती क्षेत्र को पूंजीपतियों के कब्जे से मुक्त कराने का संकल्प लिया। नरेश मीणा रविवार को बूंदी नैनवां में आयोजित आदिवासी मीणा सेवा संस्थान द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान एवं भामाशाह सम्मान समारोह में पहुंचे थे। उन्होंने मंच से कहा- प्राचीन काल में आदिवासी समाज को शिक्षा से वंचित रखा गया था, फिर भी उनके पूर्वजों ने सूझबूझ और पराक्रम से शासन किया। उन्होंने जोर दिया कि आज के लोकतंत्र में सत्ता में भागीदारी ही समाज की वास्तविक ताकत है और इसके बिना उत्थान संभव नहीं है। जूते-चप्पल का त्याग किया नरेश मीणा ने घोषणा की कि हाड़ौती को इन पूंजीपतियों के राजनीतिक कब्जे से मुक्त कराने के संकल्प के तहत उन्होंने जूते-चप्पल का त्याग किया है। उन्होंने प्रण लिया कि जब तक ऐसे नेता विधानसभा और संसद से बाहर नहीं होंगे, वे जूते नहीं पहनेंगे। मीणा ने दावा किया कि हाड़ौती में आदिवासी समाज के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है, उन्हें भय के माहौल में काम करना पड़ रहा है और उनके व्यवसाय भी बंद करवाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे सत्ता से दूर रहने का परिणाम बताया। भाजपा में शामिल नहीं होंगे मीणा ने यह भी स्पष्ट किया कि 8 महीने जेल में रहने और 32 मुकदमों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे कभी भाजपा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने भाजपा को आरक्षण विरोधी और दलित-आदिवासियों के हितों के खिलाफ काम करने वाली पार्टी बताया। मीणा ने अंता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा का टिकट ठुकराने का भी जिक्र किया। राजनीति में बहरूपिया बनना पड़ता है भगत सिंह सेना के सुप्रीमो नरेश मीणा ने कहा कि की मैने तीन विधान सभा के चुनाव लड़े है। जनता के बीच जाकर जो अनुभव मिलता है, वह किताबों में नहीं मिलता। राजनीति करने के लिए हमको बहरूपिया भी बनना पड़ता है। राजनीति में सत्ता तक पहुंचने के लिए कई तरह के काम करने पड़ते हैं। सभी समाज को साथ लेकर चलना पड़ता है। जब तक तुम्हारी सत्ता में भागीदारी नहीं होगी तुम्हारा भला नहीं हो सकता है। नरेश मीणा ने राजनीति करने वालों पर भी कटाक्ष किए। जिन्होंने चुनाव में साथ नहीं देने वालों को भी जमकर खरीखोटी सुनाई ।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *