मध्यप्रदेश विधानसभा में पूछे गए सवाल का नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम की ओर से भ्रामक और गलत जवाब देने का मामला सामने आया है। जुलाई 2024 के विधानसभा सत्र में पूछे गए प्रश्न के कथित गलत उत्तर से जुड़ा यह मामला 2019-20 से 2022-23 के बीच नपा में करीब 7 करोड़ रुपए की राजस्व गड़बड़ी से जुड़ा है। प्रकरण सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने भोपाल स्तर से तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जांच के तहत 4 पूर्व CMO समेत 7 अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। चार पूर्व CMO सहित 7 अधिकारियों को नोटिस जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें प्रशांत जैन (तत्कालीन अधीक्षक, वर्तमान CMO मंडीदीप), जेएन चौरसिया (राजस्व उप निरीक्षक), अकबर खान (तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक, वर्तमान प्रभारी CMO टिमरनी), भुवन मेहता (कंप्यूटर ऑपरेटर), प्रभात कुमार सिंह (सेवानिवृत्त CMO), माधुरी शर्मा (तत्कालीन CMO), नवनीत पांडेय (तत्कालीन CMO, वर्तमान CMO घोड़ाडोंगरी) और विनोद शुक्ल (सेवानिवृत्त CMO) शामिल हैं। मामला आयुक्त नगरीय प्रशासन, संयुक्त संचालक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है। 4 साल के बीच 7 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप जांच के दायरे में नपा नर्मदापुरम में साल 2019-20 से 2022-23 के बीच हुई कथित राजस्व गड़बड़ी को लिया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह राशि करीब 7 करोड़ रुपए बताई जा रही है। हालांकि वास्तविक स्थिति जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों के कार्यकाल में यह गड़बड़ी हुई, उनमें से दो अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन नियमों के तहत उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। विधानसभा में क्या पूछा गया था सवाल बिछिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण सिंह पट्टा ने जुलाई 2024 के विधानसभा सत्र में नगरीय विकास एवं आवास विभाग से नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम में हुई आर्थिक अनियमितताओं को लेकर सवाल पूछा था। प्रश्न क्रमांक 4239 के तहत विधायक ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की ऑडिट रिपोर्ट और ऑडिट में दर्शाई गई 7,59,58,524 रुपए की आर्थिक क्षति की जानकारी मांगी थी। इस सवाल के जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि रिपोर्ट में किसी प्रकार की अनियमितता दर्ज नहीं है। मंत्री ने इसे प्रक्रियात्मक त्रुटि बताया। हालांकि, प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्ट में राजस्व वसूली में अंतर स्पष्ट रूप से दर्ज होने की बात सामने आई है। इसी विरोधाभास को लेकर नपा द्वारा विधानसभा में गलत जानकारी देने का आरोप लगा है, जिसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई है।


