मध्यप्रदेश सरकार आज नर्मदा जयंती के मौके पर कई जगहों पर आयोजन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा जयंती पर हरदा जिले के ग्राम छिपानेर स्थित चिचोट कुटी में कुल 316.20 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि पूजन किया। मप्र सरकार द्वारा नर्मदा जयंती पर कराए जा रहे आयोजनों पर कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने सवाल उठाए हैं। मुकेश नायक बोले आज भारत की राजनीति में सबसे बड़ा विषय है धार्मिक आस्थाओं का दोहन करना, धर्म को राजनीति का औजार बना देना। भूख, गरीबी, अज्ञान और अशिक्षा जैसे विषयों से ध्यान हटा देना। वो सब इस देश में चल रहा है। नर्मदा जी, गंगा जी भी आज प्रचंड साम्प्रदायिकता का विषय हैं भारतवर्ष में। वही सब चल रहा है।
वैचारिक द्वंद्व पैदा करके मूल मुद्दों से भटकाने की कोशिश मुकेश नायक ने कहा- ये सब जो गतिविधियां हैं। सरकार की उसी प्रचंड साम्प्रदायिकता का हिस्सा हैं। अभी सरस्वती पूजन में भोजशाला का विषय आ गया था। पूरे राज्य में उसमें सनसनी फैलाई। अब कुंभ चल रहा है तो एक महीने वह चलेगा। अब नर्मदा जयंती आ गई तो वो चलेगा। एक ऐसा वैचारिक द्वंद्व पैदा करो कि मूल मुद्दों से लगातार उसको लोग अनदेखा करते रहें। ये न कहें कि, हमें नौकरी चाहिए। ये कहें कि खेत, खलिहान और किसान का क्या हो रहा है? ये न कहें कि मंहगाई बढ़ गई है। एक लीटर तेल पर 25 रुपए दाम बढ़े हैं और कोई बोलने वाला तक नहीं हैं। सौरभ शर्मा केस में आरोपियों को बयान देने की ट्रेनिंग मिली मुकेश नायक ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले पर कहा- तीनों लोगों से अलग-अलग जो बयान लिए गए, उनमें समानता है। किसी भी जांच में जब लोगों से अलग-अलग बयान लिए जाते हैं तो ये प्रथा होती है, जांच का मनोवैज्ञानिक तरीका होता है कि अलग-अलग बयान ले लें और फिर दोनों को साथ बिठाकर क्रॉस एग्जामिनेशन करें। ताकि जो अंतर्विरोध है। उनमें से कुछ ऐसी बात निकाली जा सके। ताकि हम इस पूरी जांच में ऑब्जेक्ट तक पहुंच सकें। तीनों के बयान ऐसे हो रहे जैसे ट्रेनिंग दी गई हो संयोग ऐसा देखिए कि इनको पूरी ट्रेनिंग के बाद लाया गया है। एजेंसी ने इनके जो बयान लिए हैं वो चालाकी से भरे हुए हैं। जैसे किसी वकील ने इनको पूरा प्रशिक्षण दिया हो और उस प्रशिक्षण के बाद इन्होंने अपने बयान दिए हों। तीनों के बयान एक जैसे जा रहे हैं। यानि उन्होंने एक साथ बिठाकर बयान लेने की गुंजाइश तक नहीं छोड़ी। वो जो बीच में इतने दिन गायब रहे, वो इस तमाम ट्रेनिंग की प्रक्रिया से गुजरे होंगे। लगभग 70 हजार पुलिस सरकार के अधीन है। सरकार के अंडर में ईओडब्ल्यू, साइबर क्राइम की अलग ब्रांच है। ये यह नहीं बता पा रहे कि सड़कों पर पड़ा सोना किसका है? लोग कहते हैं कि भारत सोने की चिड़िया थी। अरे चिड़िया थी नहीं है। जिस राज्य में इतनी प्रगति हो गई हो, कि 50-60 किलो सोना सड़कों पर पड़ा मिले और हर कोई कहे हमारा नहीं हैं। धन्य है ऐसी प्रगति और विकास। भाजपा प्रवक्ता ने किया पलटवार भाजपा प्रवक्ता मिलन भार्गव पलटवार करते हुए कहा कि, जहां एक तरफ नर्मदा जयंती के पावन पर्व पर करोड़ों लोग आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। वहीं महाकुंभ में गंगा मैया की पूजा-अर्चना कर करोड़ों लोग भक्ति कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी को यह सब सांप्रदायिक लग रहा है। अगर आपको हिंदू संस्कृति और हिंदू धर्म से इतना नफरत है। आप इसका कारण नहीं बता पा रहे, लेकिन लगातार करोड़ों लोगों की आस्थाओं पर ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं और कांग्रेस में इसकी प्रतिस्पर्धा चल रही है। वह चौंकाने वाली है, कांग्रेसियों को यह प्रचंड नफरत लग रही है। कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि, क्या नर्मदा जी और मां गंगा की पूजा करना सांप्रदायिकता है। यदि सांप्रदायिकता है तो कांग्रेस पार्टी स्पष्ट करें।


