नर्मदा घाटी विभाग की गलती से फसलें बर्बाद:विंध्य-महाकौशल के किसानों की फसलों पर संकट; किसान बोले- दो माह से बता रहे थे, ध्यान नहीं दिया

रविवार की दोपहर को ग्राम सगड़ा-झपनी में दाई तट नहर फूट गई। कुछ ही देर बाद हालत ऐसे हो गए कि जैसे बाढ़ आ गई हो। गेहूं, मटर और मसूर पानी के बहाव में बह गई। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिन्हें किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों पहले से नहर क्षतिग्रस्त थी, कई बार अधिकारी, सरपंच को भी बताया, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजन नर्मदा घाटी विकास विभाग (NVDD) की लापरवाही से ना सिर्फ जबलपुर बल्कि सतना और रीवा के किसान भी बर्बाद होने की कगार में पहुंच गए। कलेक्टर के निर्देश पर अब प्रशासनिक अधिकारी खराब फसलों के सर्वे में करने में जुट गए हैं। बाढ़ जैसा सैलाब
बरगी बांध की दाईं तट नहर से जबलपुर जिले के साथ-साथ सतना और रीवा के हजारों किसानों को खेती के लिए पानी दिया जाता है। रविवार दोपहर को नहर फट गई। जिसके चलते आसपास बाढ़ जैसे हालात बन गए। देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ फसल पानी में बहर गई। कुछ ही देर बाद प्रशासनिक और नर्मदा घाटी के अधिकारी मौके पर पहुंचे जहां उन्हें ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। आनन-फानन में डैम से गिर रहे पानी को बंद करवाया गया। नहर में लबालब पानी होने के कारण छह गांव के खेतों में पानी बह गया। नर्मदा घाटी विकास की लापरवाही
किसान सोहन लाल का कहना है कि गांव के पास से निकलने वाली नहर में पानी का रिसाव हो रहा है। यह जानकारी नर्मदा घाटी विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को अच्छे से थी। दो साल पहले भी बताया गया था कि नहर के दोनों और से पानी का रिसाव हो रहा है। बीते 15 दिनों से नहर का पानी हर्रई नाले में जाकर मिलने लगा था। इस घटना के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वह नर्मदा घाटी विभाग के अधिकारी। किसान सोहन लाल का कहना है कि नहर फूटने से जबलपुर जिले के किसानों की फसल पानी में भीगने से खराब हुई तो वही सतना और रीवा के किसानों की फसल सूखे से अब खराब होगी।
बांध से निकलने वाले पानी को अभी बंद कर दिया गया है, इसके कारण पानी आगे तक नहीं पहुंच पाएंगे। पानी के अभाव में फसलें सूख जाएगी। सगड़ा-छपनी गांव में रहने वाले अभिषेक दुबे ने 60 एकड़ जमीन में गेहूं की फसल लगाई थी। नहर फूटने से उनकी सारी जमीन में पानी भर गया और फसल डूब गईं। खराब फसल देख अभिषेक इस कदर नाराज हुए कि खराब फसल का सर्वे करने गांव पहुंची तहसीलदार और पटवारी से बहस हो गई। अभिषेक का कहना है कि आज हमारा नुकसान हुआ तो सर्वे और मुआवजे की बात करते हुए अधिकारी आए हैं। पूछताछ और लिखा-पढ़ी करने के बाद चले जाएंगे और फिर मुआवजा के नाम पर चंद रुपए बांट दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नहर के आसपास से पानी बहकर नाले में मिल रहा था, सभी जानते थे, पर किसी ने नहर की मरम्मत नहीं करवाई और फिर वहीं हुआ जिसका डर था। सैकड़ों एकड़ फसल सड़ने की कगार पर
रविवार की दोपहर से ही बांध से निकलकर नहर में मिलने वाले पानी को रोक दिया गया है। इसके बाद भी खेतों में पानी में भरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पानी में डूबने से हजारों एकड़ गेहूं,चना और मसूर की फसल पानी में डूब गई है। किसान तुलसी राम के पास चार एकड़ जमीन है। खेती से ही परिवार का जीवन यापन होता है। कर्ज लेकर खेत में फसल लगाई थी, जो कि नहर फूटने के कारण पूरी बर्बाद हो गई। अब तुलसी राम के सामने सबसे बड़ी परेशानी कर्ज चुकाने है की। उन्होंने बताया कि अगर समय रहते नहर को ठीक कर दिया जाता, तो आज यह हालात नहीं बनते। हर तरफ से किसान ही होंगे बर्बाद
नहर फूटने के कारण बरगी बांध से दाई तट की नहर में छोड़ा जाने वाला पानी फिलहाल रोक दिया गया है। जितना पानी नहर में भरा हुआ है, वह अभी भी खेतों तक पहुंच रहा है। एक तरफ किसान जहां खेतों में पानी भरने से परेशान है, तो वहीं दूसरी और वो किसान भी बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गया है, जो नहर में आश्रित था। मरम्मत के लिए बरगी डैम से पानी रोक दिए जाने के कारण फसल सूखने लगी हैं। किसानों को कहना है कि नहर को ठीक होने में कम से कम 1 माह लगेगा। ऐसे में ना सिर्फ जबलपुर बल्कि सतना और रीवा के हजारों किसानों की फसल सूख जाएंगी, क्योंकि अधिकतर किसान फसल की सिंचाई के लिए नहर में ही आश्रित है। कटनी-सतना-रीवा में भी फसल होगी बर्बाद
रविवार को जानकारी लगी थी कि कलेक्टर ने आदेश कर दिए थे कि सोमवार से नहर के मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा, लेकिन कोई भी नहीं आया। उन्होंने बताया कि दुख की बात तो यह भी है कि स्थानीय विधायक या फिर कोई अन्य नेता भी हालात को देखने नहीं पहुंचे हैं। नरेंद्र ने बताया कि 80 से 90 एकड़ जमीन में गेहूं का फसल लगाई थी। नहर के पानी के भरोसे ही थे, पर पानी मिलेगा नहीं ऐसे में फसल का खराब होना तय है। नर्मदा घाटी विकास विभाग की एक छोटी सी लापरवाही से हजारों नहीं बल्कि लाखों एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो गईं हैं। जबलपुर के अलावा कटनी, सतना और रीवा के किसानों को भी यहीं से पानी मिलता है, अब बांध से पानी छोड़ना बंद कर दिया है, तो फसल का सूखना तय है। पुल में भी खतरा मंडराया
सगड़ा झपनी गांव को दूसरे गांव से जोड़ने के लिए नहर के ऊपर एक पुल बना है। रविवार को नहर फटने के बाद जिस तेज गाति से मिट्टी को काटते हुए पानी बहा है,उसने पुल पर भी खतरा बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के नीचे की मिट्टी बहने और क्रेक आ जाने के कारण इसका भी जल्द से जल्द रिपेयरिंग करना होगा। ग्रामीण रमेश कुशवाहा ने बताया कि नहर के साथ-साथ पुल पर भी प्रशासन को नजर बनाए रखने की जरूरत है। ड्रोन से हो रहा है सर्वे कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार सोमवार को मौके पर पहुंचे, और ड्रोन की मदद से खराब हुई फसलों का सर्वे किया जा रहा है। तहसीलदार पूर्णिमा खंडायत का कहना है कि ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में लीकेज हो रहा था, जो कि रविवार को बड़े रूप में सामने आया है। लापरवाही किसकी है, यह जांच का विषय है। फिलहाल अभी फसल छति का सर्वे हो रहा है। छह गांव में शुरूआती जांच चल रही है, जो कि आगे और भी गांव में बढ़ सकती है। एक नजर दायीं तट नहर पर
जबलपुर की रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना (बरगी बांध) की दायीं तट नहर का पानी मुख्य रूप से जबलपुर से होकर कटनी, रीवा और सतना जिलों तक जाता है, जो इन क्षेत्रों की लगभग 2,45,010 हेक्टेयर (CCA) कृषि भूमि को सिंचित करती है। यह नहर प्रमुख रूप से रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा प्रदान करती है। बायीं तट नहर में भी रिसाव
बरगी बांध से निकली बाईं तट नहर से भी रिसाव हो रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस एकवाडक्ट में रिसाव को सुधारने के लिए जल्द शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। बरगी बांध के ब्लाक नंबर 3/10 सीवेज हो रहा है। भोपाल और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम जांच कर चुकी है। पानी का रिसाव सामान्य स्तर से अधिक पाया गया, लेकिन टेंडर और काम देने की प्रक्रिया में ही मामला उलझा हुआ है। बताया जा रहा है कि 2021 में भी पाटन और मझौली ब्लाक में बरगी बांध की नहरें फूटी थी। पाटन के पास जिनवाणी कला में नहर फटने से लगभग ढाई सौ एकड़ में धान की फसल को नुकसान हुआ था। चरगंवा में नहर फूटने से कोहा नाले में पानी भर गया था। नहर की लंबाई: लगभग 197.40 किमी मुख्य नहर के साथ, इसकी सहायक नहरें हजारों किलोमीटर तक फैली हैं। सिंचाई क्षेत्र: यह परियोजना मुख्य रूप से जबलपुर, कटनी, रीवा और सतना के सूखे वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाती है। सिंचाई क्षमता: यह लगभग 2,45,0102 हेक्टेयर।
सिंचाई का उद्देश्य: इस नहर का प्रमुख उद्देश्य इन जिलों के कमान क्षेत्रों में रबी फसलों की सिंचाई करना है।
नहर पानी की आपूर्ति के माध्यम से जबलपुर और कटनी शहरों को घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी दिया जाता है। ये खबर भी पढ़ें… बरगी बांध की नहर टूटी, खेतों में घुसा पानी बरगी थाना क्षेत्र में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दोपहर करीब 12 बजे बरगी बांध की मुख्य दाईं तट नहर ग्राम सगड़ा-झपनी के पास टूट गई। नहर टूटते ही तेज बहाव के साथ पानी आसपास के 6 गांवों के खेतों में घुस गया, जिससे किसानों की खड़ी फसलें डूब गईं। देखते ही देखते खेत तालाब में तब्दील हो गए और ग्रामीणों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।पूरी खबर पढ़ें

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