डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए अब नगर के सात बड़े नालों का गंदा पानी नदी में नहीं गिरने दिया जाएगा। लंबे समय से श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों की मांग को देखते हुए राज्य शासन ने इस परियोजना के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है। ठेकेदार ने आज से ही मौके पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत श्मशान घाट, नर्मदा मंदिर पुल, गायत्री मंदिर और कॉलेज के पास वाले प्रमुख नालों का पानी रोका जाएगा। इसके लिए रिटेनिंग वॉल और लिफ्टिंग पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। नालों के पानी को सीवर लाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाया जाएगा, जहां पानी को साफ कर उसे सिंचाई के उपयोग में लाया जाएगा। मेसर्स जे एम रमानी एंड कंपनी को यह काम तीन महीने की समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। परिक्रमावासियों और श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत कलेक्टर ने बताया कि नर्मदा में मिल रही गंदगी को लेकर लोगों में काफी गुस्सा था। इस समस्या को सुलझाने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग के सीनियर अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए थे, जिसके बाद यह मंजूरी मिली है। परियोजना के पूरा होने से नर्मदा का जल स्वच्छ रहेगा और परिक्रमावासियों और श्रद्धालुओं को गंदगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगर परिषद सीएमओ और जनसंपर्क अधिकारी भी मौजूद रहे। दूसरे तट के लिए भी बनेगा विशेष प्रस्ताव नर्मदा को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए प्रशासन ने भविष्य की योजना भी तैयार कर ली है। कलेक्टर ने जानकारी दी कि साकेत नगर और हंस नगर की बसाहट से निकलने वाली गंदगी को रोकने के लिए नर्मदा के दूसरे तट पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक नया प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा जाएगा, ताकि नदी के दोनों किनारों से आने वाला प्रदूषण पूरी तरह बंद हो सके।


